परियाथुकावु बेदखली विवाद: केरल सरकार का आश्वासन, कोई भी दलित परिवार बेघर नहीं होगा

परियाथुकावु बेदखली विवाद: केरल सरकार का आश्वासन, कोई भी दलित परिवार बेघर नहीं होगा

परियाथुकावु बेदखली विवाद: केरल सरकार का आश्वासन, कोई भी दलित परिवार बेघर नहीं होगा
Modified Date: May 25, 2026 / 07:42 pm IST
Published Date: May 25, 2026 7:42 pm IST

तिरुवनंतपुरम, 25 मई (भाषा) केरल के मुख्यमंत्री वी डी सतीशन ने सोमवार को कहा कि एर्नाकुलम जिले के परियाथुकावु के निवासियों से जुड़े काफी समय से लंबित विवाद के समाधान के लिए सरकार द्वारा प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि कोई भी दलित परिवार बेघर नहीं होगा।

इस मुद्दे से निपटने के तरीके को लेकर वामपंथी दलों की आलोचना के बीच, मंत्रिमंडल की बैठक के बाद सतीशन ने कहा कि सरकार का दृष्टिकोण इस बात पर केंद्रित है कि यदि बेदखली की जाती है तो पुनर्वास सुनिश्चित किया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘हमारा रुख स्पष्ट है। यदि अदालत का आदेश लागू होता है, तो हम वैकल्पिक भूमि और आवास सुनिश्चित करेंगे, ताकि इन परिवारों का पुनर्वास हो सके। हम उन्हें बेघर नहीं होने देंगे।’’

सतीशन ने केरल उच्च न्यायालय के एक हालिया निर्देश के बारे में पूछे जाने पर यह बात कही। उच्च न्यायालय ने पूर्व में एक निजी पक्ष द्वारा हासिल उच्चतम न्यायालय के आदेश के मुताबिक भूमि से बेदखली का निर्देश दिया था।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने समझौता विकल्पों और मानवीय राहत उपायों पर विचार करने के लिए महाधिवक्ता सहित वरिष्ठ अधिकारियों और कानूनी प्राधिकारियों के साथ पहले ही चर्चा की है।

सतीशन ने इस मामले में बेदखली आदेशों को लागू करने के पूर्व के प्रयासों का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि पूर्ववर्ती वामपंथी सरकार लंबे समय से चले आ रहे विवाद को प्रभावी ढंग से हल करने में विफल रही थी।

उन्होंने कहा कि सरकार ने महाधिवक्ता को प्रभावित परिवारों की स्थिति पर विचार करने के बाद अदालत से और समय मांगने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा कि पुनर्वास को प्राथमिकता देते हुए कानूनी निर्देशों के अनुसार ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

परियाथुकावु बेदखली मामला एर्नाकुलम के किझाक्कंबलम के पास लंबे समय से चले आ रहे भूमि विवाद से संबंधित है, जहां दलित परिवार दशकों से निजी पक्षों द्वारा दावा की गई भूमि पर रह रहे हैं।

एक अदालत ने स्वामित्व विवाद के आधार पर बेदखली का आदेश दिया है, लेकिन बेदखली के बार-बार के असफल प्रयासों और परिवारों के पुनर्वास की मांगों के कारण यह मामला विवादों में घिर गया है।

इस मुद्दे ने राज्य में राजनीतिक बहस छेड़ दी है, जिसमें सत्तारूढ़ और विपक्षी, दोनों पक्ष लंबे समय से चले आ रहे विवाद के लिए एक-दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगा रहे हैं।

माकपा-नीत पूर्ववर्ती वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ) सरकार पर हमला करते हुए सतीशन ने कहा, ‘‘यह देखकर मैं स्तब्ध रह गया – पिछली कैबिनेट के दो पूर्व मंत्री वहां विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं। यह सब हमारी सरकार के शपथ ग्रहण के ठीक एक दिन बाद हुआ।’’

उन्होंने कहा कि निवासियों को बेदखल करने का 15वीं बार प्रयास किया गया था।

मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया, ‘‘पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल के दौरान, बेदखली के लिए अदालत के निर्देश पर 14 बार प्रयास किए गए, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। पूर्ववर्ती सरकार ने इस मुद्दे को सुलझाने के लिए एक छोटा सा कदम भी नहीं उठाया।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह जमीन से संबंधित एक निजी व्यक्ति द्वारा दायर किया गया निजी मामला है। अदालत के आदेश को लागू कराने के लिए 14 बार अपील की गई, लेकिन (पूर्ववर्ती एलडीएफ सरकार द्वारा) कुछ नहीं किया गया। हमने सत्ता में आने के ठीक अगले दिन इस पर कार्रवाई की।’’

उन्होंने कहा कि सरकार ने तुरंत एर्नाकुलम से उच्च शिक्षा मंत्री रोजी एम. जॉन को विरोध कर रहे परिवार के सदस्यों से बातचीत करने के लिए भेजा।

सतीशन ने कहा, ‘‘हमने इस बात का आकलन किया कि क्या किया जा सकता है। हमारा निर्णय यह है कि यदि अदालत का आदेश लागू होता है, तो आठ परिवार बेघर नहीं होने चाहिए।’’

भाषा सुभाष सुरेश

सुरेश


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