कोच्चि, 16 जून (भाषा) केरल के एर्नाकुलम जिले में लंबे समय से लंबित परियाथुकावु भूमि विवाद के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। प्रभावित निवासियों और भूमि मालिकों के बीच एक समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद उसी स्थान पर सात दलित परिवारों के पुनर्वास का रास्ता साफ हो गया है।
यह समझौता सोमवार रात उच्च शिक्षा मंत्री रोजी एम जॉन की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में किया गया। बैठक में जिला प्रशासन के अधिकारी, प्रभावित निवासियों के प्रतिनिधि और भूमि मालिकों के प्रतिनिधि भी मौजूद थे।
मंत्री ने कहा कि लगभग पांच दशक से लंबित यह विवाद सभी पक्षों के साथ पांच दौर की वार्ता के बाद सुलझाया गया है। उन्होंने कहा, ‘सभी पक्षों की बात विस्तार से सुनने के बाद हम अंतिम निर्णय पर पहुंच सके। इस समझौते तक पहुंचने में सहयोग करने वाले सभी लोगों का मैं सरकार की ओर से धन्यवाद करता हूं।’
समझौते के तहत सात परिवारों में से प्रत्येक को उनके वर्तमान निवास स्थान से सटी हुई पांच-पांच सेंट भूमि आवंटित की जाएगी। इसके अलावा, उनके उपयोग के लिए तीन मीटर चौड़ी पहुंच सड़क उपलब्ध कराई जाएगी, जिसे बाद में स्थानीय पंचायत को सौंप दिया जाएगा। वहीं, परिवारों को आवंटित भूखंडों और शेष निजी संपत्ति के बीच एक सीमा दीवार का निर्माण भी किया जाएगा।
इसके तहत सरकार प्रायोजन व्यवस्था के माध्यम से इन परिवारों के लिए कम से कम 1,000 वर्ग फुट क्षेत्रफल वाले मकानों के निर्माण की निगरानी करेगी। लक्ष्य है कि यह कार्य एक वर्ष के भीतर पूरा कर लिया जाए। तब तक इन परिवारों को अपने मौजूदा घरों में रहने की अनुमति दी जाएगी।
मंत्री ने बताया कि भूमि और पहुंच मार्ग के सीमांकन के लिए सर्वेक्षण विभाग की निगरानी में अगले सप्ताह से सर्वे कार्य शुरू किया जाएगा, जिसे 30 जून तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि सीमाएं अंतिम रूप से तय होने के बाद नए मकानों के निर्माण का कार्य शुरू किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि प्रभावित परिवारों को अनुसूचित जाति विकास विभाग के तहत उपलब्ध सभी लाभ भी प्रदान किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि साथ ही अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि इन योजनाओं और सुविधाओं का लाभ परिवारों तक समयबद्ध और प्रभावी ढंग से पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए।
अधिकारियों ने बताया कि समझौते के क्रियान्वयन की निगरानी मूवट्टुपुझा के राजस्व मंडल अधिकारी (आरडीओ) और पेरुम्बवूर के उप पुलिस अधीक्षक (डीएसपी) करेंगे। साथ ही उन्हें जिलाधिकारी को साप्ताहिक प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
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