नयी दिल्ली, दो अप्रैल (भाषा) संसद ने अमरावती को आंध्र प्रदेश की एकमात्र और स्थायी राजधानी के रूप में मान्यता देने संबंधी विधेयक को बृहस्पतिवार को मंजूरी दे दी।
राज्यसभा ने आंध्र प्रदेश पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2026 को संक्षिप्त चर्चा एवं गृह राज्यमंत्री नित्यानन्द राय के जवाब के बाद ध्वनिमत से पारित कर दिया। लोकसभा इसे ही कल ही पारित कर चुकी थी।
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के प्रमुख घटक दल तेलुगु देशम पार्टी (तेदेपा) और राज्य के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को साकार करने की दिशा में इस विधेयक को एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि आंध्र प्रदेश विधानसभा में 28 मार्च 2026 को एक प्रस्ताव पारित किया गया, जिसमें भारत सरकार से राज्य (आंध्र प्रदेश) की राजधानी के रूप में अमरावती को वैधानिक दर्जा दिलाने के लिए आंध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम, 2014 की कुछ धाराओं में संशोधन करने का अनुरोध किया गया।
उन्होंने कहा कि ‘‘विधेयक में यह उपबंध किया गया है कि निर्दिष्ट अवधि की समाप्ति पर अमरावती एक नयी राजधानी होगी।’’
राय ने सदन को बताया कि राज्य विधानसभा के 28 मार्च 2026 के संकल्प को प्रभावी बनाने के लिए और आंध्र प्रदेश राज्य की राजधानी (अमरावती) के संबंध में वैधानिक स्पष्टता लाने के उद्देश्य से 2014 के अधिनियम की कुछ धाराओं में संशोधन का प्रस्ताव किया गया है।
विधेयक के कारणों एवं उद्देश्य में कहा गया है कि अमरावती को आंध्र प्रदेश की राजधानी बनाने के लिए केंद्र सरकार से अनुरोध करने का एक प्रस्ताव राज्य विधानसभा में इस वर्ष 28 मार्च को पारित किया गया।
इसके अनुसार, विधेयक के कानून बनने के बाद अमरावती को दो जून 2024 से आंध्र प्रदेश की राजधानी माना जाएगा।
इससे पहले विधेयक पर चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस की रेणुका चौधरी ने कहा कि आंध्र प्रदेश के साथ संसद में किए गये वादों को पूरा किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना के विकास के लिए इन वादों को पूरा किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पोलावरम परियोजना अभी तक अधूरी पड़ी है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार दक्षिण भारत के राज्यों की अनदेखी कर रही है।
चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए नागर विमानन मंत्री एवं तेदेपा नेता के राममोहन नायडू ने कहा कि भारत के इतिहास में आंध्र प्रदेश एकमात्र ऐसा राज्य है जिसके पास विभाजन के बाद कोई राजधानी नहीं है। उन्होंने कहा कि आज आंध्र प्रदेश के लोगों के पास विकास के लिए तेदेपा प्रमुख चंद्रबाबू नायडू के अलावा उम्मीद की कोई किरण नहीं है।
उन्होंने कहा कि आज उन्हें इस विधेयक को लेकर गर्व महसूस हो रहा है क्योंकि आंध्र प्रदेश के लोगों और अमरावती के किसानों एवं महिलाओं सहित सभी निवासियों की आकांक्षा को संसद में पूरा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि अमरावती के किसानों ने राजधानी के लिए जगह दान की।
नायडू ने आरोप लगाया कि पिछली सरकार के शासनकाल में अमरावती को राज्य की राजधानी नहीं बनाने के निर्णय के खिलाफ वहां की महिलाओं ने शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक ढंग से प्रदर्शन किया। उन्होंने आरोप लगाया कि तत्कालीन सरकार की मशीनरी ने प्रदर्शन कर रही एक गर्भवती महिला पर प्रहार किया।
उन्होंने कहा कि यह राजधानी कृष्णानदी के तट पर बनायी जा रही है।
नायडू ने कहा कि यह विश्व स्तरीय राजधानी होगी और दुनिया भर के लोग इसमें निवेश करने आएंगे।
चर्चा में भाजपा के के लक्ष्मण, पाका वेंकट सत्यनारायण, रयागा कृष्णैया, बीजद के निरंजन बिशी, तृणमूल कांग्रेस के मोहम्मद नदीमुल हक, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के वाई वेंकट सुब्बा रेड्डी, राष्ट्रीय जनता दल के संजय यादव, भारत राष्ट्र समिति के के आर सुरेश रेड्डी और रविचंद्र वद्दिराजू, जदयू के संजय कुमार झा, तेदेपा के मस्तान राव यादव बीधा और साना सतीश बाबू, आम आदमी पार्टी के डॉ संदीप कुमार पाठक और शिवसेना (उबाठा) की प्रियंका चतुर्वेदी ने भी हिस्सा लिया।
विधेयक पारित होने के बाद सभापति सी पी राधाकृष्णन ने सदन और पूरे देश की ओर से आंध्र प्रदेश के लोगों को नयी राजधानी के लिए बधाई दी।
भाषा माधव
माधव मनीषा
मनीषा