वंदे मातरम् के अपमान को दंडनीय बनाने के प्रावधान वाले विधेयक को संसद की मंजूरी

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वंदे मातरम् के अपमान को दंडनीय बनाने के प्रावधान वाले विधेयक को संसद की मंजूरी

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  • Publish Date - July 30, 2026 / 04:09 PM IST,
    Updated On - July 30, 2026 / 04:09 PM IST

नयी दिल्ली, 30 जुलाई (भाषा) संसद ने बृहस्पतिवार को उस विधेयक को पारित कर दिया, जिसके प्रावधानों के तहत राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के गायन के दौरान किसी भी तरह का व्यवधान या उसका अपमान आपराधिक कृत्य माना जाएगा और इसके लिए तीन वर्ष तक की सजा हो सकती है।

राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के साथ ही उसी सम्मान के साथ राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन को अनिवार्य बनाने वाले ‘राष्ट्र गौरव अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026’ को लोकसभा ने बृहस्पतिवार को द्रमुक समेत विपक्षी दलों के सदस्यों के हंगामे के बीच संक्षिप्त चर्चा के बाद ध्वनिमत से मंजूरी प्रदान कर दी।

इससे पहले उच्च सदन ने बुधवार को विधेयक को मंजूरी प्रदान की थी।

प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर में ‘चढ़ावा चोरी’ जैसे मुद्दों को लेकर विपक्ष के हंगामे के कारण लोकसभा की बैठक दो बार के स्थगन के बाद अपराह्न साढ़े तीन बजे शुरू हुई तो विपक्षी सांसद पहले की तरह ही नारेबाजी कर रहे थे।

हंगामे के बीच ही विधेयक पर सदन में हुई संक्षिप्त चर्चा का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा कि इस विधेयक के पारित होने के बाद राष्ट्रगीत को वही सम्मान मिलेगा जो राष्ट्रगान को मिलता है।

उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ एक भारत-श्रेष्ठ भारत और विकसित भारत के संकल्प का प्रतीक है।

उन्होंने द्रमुक सांसदों की चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि यह विधेयक राष्ट्र गौरव का विधेयक है जो किसी राज्य, किसी व्यक्ति व किसी विचारधारा के खिलाफ नहीं है।

इससे पहले द्रमुक सांसदों ने सदन में विधेयक पारित किए जाने का विरोध किया।

विधेयक पर निचले सदन में हुई संक्षिप्त चर्चा में भाग लेते हुए द्रमुक सांसद के. कनिमोई ने कड़ा विरोध दर्ज कराया और आरोप लगाया कि सरकार इसके साथ हिंदुत्व के एजेंडे को राष्ट्रीयता के रूप में पेश कर रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह देश के नागरिकों के विरुद्ध है। इस तरह राष्ट्रवाद नहीं थोपा जा सकता।’’

कनिमोई ने विधेयक को संघीय ढांचे के विरुद्ध बताते हुए यह भी कहा कि विभिन्न मुद्दों पर सदन में हंगामे के बीच विधेयक को पारित नहीं किया जाना चाहिए।

उन्होंने इसे राज्यों के हितों के और धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ बताया।

द्रमुक सदस्य ने कहा कि तमिलनाडु और अन्य राज्यों में इसका विरोध हो रहा है।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्य संबित पात्रा ने कहा कि यह साधारण विधेयक नहीं है।

उन्होंने विपक्ष को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि जो राष्ट्र को नहीं समझते, वे यहां शोर मचा रहे हैं।

पात्रा ने कहा कि डॉ राजेंद्र प्रसाद ने 1950 में संविधान सभा में यह आश्वासन दिया था कि जन गण मन और वंदे मातरम् दोनों एक ही रूप से गाए जाएंगे और दोनों को एक ही सम्मान मिलेगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि 76 वर्षों में कांग्रेस की सरकारों ने एक परिवार को ऊपर रखा, राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को नहीं।

द्रमुक के ए राजा ने विधेयक पर अपना संशोधन प्रस्तुत करते हुए कहा, ‘‘आज देश और संसद के लिए बहुत खतरनाक दिन है। यह विधेयक मजाक की तरह है।’’

सदन ने उनके संशोधन को खारिज कर दिया और द्रमुक समेत विपक्षी सदस्यों के शोर-शराबे के बीच ध्वनिमत से विधेयक को मंजूरी प्रदान कर दी।

इसके बाद सदन की बैठक दिनभर के लिए स्थगित कर दी गई।

इस विधेयक के तहत 1971 के मूल अधिनियम में संशोधन का प्रावधान किया गया है।

विधेयक के उद्देश्यों और कारणों में कहा गया है कि राष्ट्रगान की तरह राष्ट्रगीत को गाने से जानबूझ कर रोकने या किसी सभा में इसके गायन में व्यवधान पैदा करने को एक दंडनीय अपराध बनाने का प्रावधान किया जाता है।

इसमें बताया गया है कि 24 जनवरी 1950 को संविधान सभा में डॉ राजेन्द्र प्रसाद ने कहा था कि ‘‘वंदे मातरम्’’ को ‘‘जन गण मन’’ के समान ही सम्मान और बराबर का दर्जा दिया जाएगा।

इसमें कहा गया कि वर्तमान में कोई ऐसा विधिक उपबंध नहीं है जो ‘वंदे मातरम्’ गायन के अपमान को रोकता हो। विधेयक में राष्ट्रगीत के अपमान के लिए तीन वर्ष तक की सजा या जुर्माना अथवा दोनों के प्रावधान हैं।

भाषा वैभव हक

हक