नयी दिल्ली, 30 जुलाई (भाषा) राज्यसभा ने बृहस्पतिवार को ‘लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026’ को मंजूरी दे दी और इसके साथ ही विधेयक को संसद की मंजूरी मिल गयी जिसमें प्रश्न पत्र लीक करने के अपराध में दस साल तक की सजा तथा 50 लाख रूपये तक के जुर्माने का प्रावधान है।
नीट प्रश्नपत्र लीक की पृष्ठभूमि में लाए गए लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 को लोकसभा ने एक दिन पहले ही मंजूरी दी थी।
प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब दिया और उनके जवाब के बाद सदन ने ध्वनिमत से विधेयक को मंजूरी प्रदान कर दी। सदन ने विपक्ष द्वारा विधेयक पर लाये गये संशोधन प्रस्तावों को ध्वनिमत से खारिज कर दिर्या
मंत्री के जवाब के पहले कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों के सदस्यों ने गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग करते हुए सदन से वाक आउट किया।
वाक आउट पर सदन के नेता जेपी नड्डा ने निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष पूरी तरह से मुद्दाविहीन हो गया है और उसने अपनी करतूत से इसे साबित भी कर दिया है।
चर्चा का जवाब देते हुए जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह विधेयक सिर्फ पेपर लीक से नहीं जुड़ा हुआ है बल्कि परीक्षा में कदाचार से जुड़े विभिन्न पहलुओं को भी शामिल किया गया है।
उन्होंने अपने जवाब में विपक्ष पर निशाना साधा और कहा कि उसने चर्चा में विपक्ष शासित राज्यों में हुए पेपर लीक का जिक्र नहीं किया।
उन्होंने शिक्षा में सुधार के लिए सरकार द्वारा उठाए गए विभिन्न कदमों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने मेडिकल शिक्षा को वहनीय बनाने पर जोर दिया और ‘‘मैनेजमेंट कोटा’’ को खत्म किया। उन्होंने कहा कि सरकार ने सीटों में वृद्धि करने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि सरकार ने न सिर्फ मेडिकल शिक्षा में बल्कि उच्च शिक्षा पर जोर दिया है और विश्वविद्यालयों एवं उच्च शिक्षण संस्थानों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) संशोधन विधेयक, 2026 के प्रावधानों के अनुसार परीक्षाओं में प्रश्नपत्र लीक करने या अनुचित साधनों का इस्तेमाल करने वाले व्यक्तियों को कम से कम पांच साल और अधिकतम 10 साल तक के कारावास तथा 50 लाख रुपये तक के जुर्माने की सजा हो सकती है।
इसी तरह संगठित अपराधों के लिए कम से कम सात साल के कारावास और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रस्ताव है।
प्रस्तावित संशोधनों के तहत सभी जांच दो महीने के भीतर पूरी करनी होंगी।
विधेयक में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को त्वरित अदालतें स्थापित करने का निर्देश देने का भी प्रस्ताव है। ये अदालतें आरोपपत्र दाखिल किए जाने के तीन महीने के भीतर मुकदमे की कार्यवाही पूरी करेंगी।
भाषा अविनाश माधव
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