जन्म और मृत्यु का पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को मिली संसद की मंजूरी

जन्म और मृत्यु का पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को मिली संसद की मंजूरी

जन्म और मृत्यु का पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को मिली संसद की मंजूरी
Modified Date: August 4, 2026 / 03:17 pm IST
Published Date: August 4, 2026 3:17 pm IST

नयी दिल्ली, चार अगस्त (भाषा) राज्यसभा ने मंगलवार को जन्म और मृत्यु का पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी।

दो बार के स्थगन के बाद दोपहर दो बजे जब उच्च सदन की बैठक पुन: शुरू हुई तब उपसभापति हरिवंश की अनुमति से गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने जन्म और मृत्यु का पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 पारित करने के लिए पेश किया।

राय ने सदन में विपक्ष के हंगामे के बीच यह विधेयक पेश किया।

विधेयक पर हुई संक्षिप्त चर्चा का जवाब देते हुए गृह राज्य मंत्री ने कहा कि इस विधेयक का उद्देश्य जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 (2023 में संशोधित) की धारा 13(3) में और संशोधन करना है, ताकि विलंब से होने वाले पंजीकरण के प्रावधानों को अधिक कड़ा बनाया जा सके।

मौजूदा प्रावधानों के तहत यदि जन्म या मृत्यु का पंजीकरण एक वर्ष से अधिक की देरी से कराया जाता है, तो इसके लिए जिला मजिस्ट्रेट (डीएम), उप-मंडल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) अथवा किसी कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश की आवश्यकता होती है।

विधेयक में देरी की अवधि के आधार पर दो-स्तरीय मंजूरी व्यवस्था का प्रावधान किया गया है।

राय ने कहा ‘‘देश में जन्म लेने वाले हर बच्चे का जन्म पंजीकरण समय पर होना चाहिए, ताकि उसे उसके अधिकारों का लाभ मिल सके। पहले व्यवस्था थी कि जन्म या मृत्यु का पंजीकरण 21 दिन के भीतर होता था और 21 दिन से एक साल की अवधि के बीच पंजीकरण के लिए विलंब शुल्क देना होता था।’’

उन्होंने कहा कि जन्म और मृत्यु का एक साल के अंदर सामान्य प्रक्रिया से पंजीकरण होता है तथा इसमें कोई बदलाव नहीं किया गया है। ‘‘लेकिन यदि जन्म या मृत्यु की सूचना एक वर्ष से अधिक और दो वर्ष के भीतर दी जाती है, तो इसका पंजीकरण जिला मजिस्ट्रेट (डीएम), उप-विभागीय मजिस्ट्रेट (एसडीएम) या उनके द्वारा अधिकृत कार्यपालक दंडाधिकारी की अनुमति और सत्यापन के बाद ही होगा।’’

उन्होंने कहा कि यदि जन्म या मृत्यु की घटना को दो वर्ष से अधिक समय बीत चुका है, तो अब इसके पंजीकरण के लिए प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (जेएमएफसी) का आदेश अनिवार्य कर दिया गया है।

उनके अनुसार, सक्षम प्राधिकारी द्वारा पंजीकरण के लिए अनुमति देने से पहले, दी गई जानकारी की प्रामाणिकता की जांच की जाएगी।

मंत्री के जवाब के बाद विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी गई।

लोकसभा ने 31 जुलाई को विपक्षी दलों के सदस्यों के हंगामे के बीच बिना चर्चा के इस विधेयक को पारित कर दिया था।

विपक्षी सदस्यों ने कहा कि यह अत्यंत महत्वपूर्ण विधेयक है और गृह मंत्री अमित शाह को सदन में होना चाहिए। विपक्षी सदस्यों ने गृह मंत्री की सदन में अनुपस्थिति को लेकर नारे भी लगाए। हंगामे के बीच ही विधेयक पर संक्षिप्त चर्चा हुई और गृह राज्य मंत्री राय ने चर्चा का जवाब दिया।

इससे पहले विधेयक पर हुई संक्षिप्त चर्चा में भाजपा की दर्शना सिंह, विश्वजीत सिन्हा, साधना सिंह, तृणमूल की ममता ठाकुर, द्रमुक के तिरुचि शिवा, बीजद के संतृप्त मिश्रा, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी के मेदा रघुनाथ रेड्डी, अन्नाद्रमुक के एम थंबीदुरै, एम धनपाल, बीआरएस के रविचंद्र वद्दिराजू, माकपा के वी शिवदासान, यूपीपी (एल) के प्रमोद बोरो और शिवसेना की ज्योति नागनाथ वाघमारे ने हिस्सा लिया।

भाषा मनीषा अविनाश

अविनाश


लेखक के बारे में