नयी दिल्ली, 25 फरवरी (भाषा) संसदीय सूत्रों ने मद्रास उच्च न्यायालय के एक न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने संबंधी विपक्ष के कदम पर बुधवार को सवाल खड़े किए और कहा कि किसी न्यायाधीश को न्यायिक फैसले के लिए संसद द्वारा नहीं हटाया जा सकता है।
उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार और कदाचार उच्चतम न्यायालय या किसी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने के मानदंड हो सकते हैं।
उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया को ‘महाभियोग’ कहा जाता है।
पिछले साल दिसंबर में द्रमुक के नेतृत्व में 100 से अधिक विपक्षी सांसदों ने मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश जी आर स्वामीनाथन को उनके एक फैसले के बाद हटाए जाने के लिए प्रस्ताव लाने का नोटिस दिया था।
उन्होंने जो फैसला सुनाया था उसमें हिंदू भक्तों को थिरुप्पारनकुंद्रम पहाड़ी के ऊपर ‘दीपथून’ स्तंभ पर दीपक जलाने की अनुमति दी गई थी।
तमिलनाडु में द्रमुक सरकार ने तर्क दिया था कि फैसले से सांप्रदायिक तनाव पैदा हुआ।
बाद में दो न्यायाधीयों की पीठ ने फैसले को बरकरार रखा था।
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