Parliament Debate on Naxalism: ‘माओवाद के डेडलाइन पर बड़ी डिबेट’… नक्सलवाद के खात्मे पर 31 मार्च को संसद में होगा मंथन.. ये सांसद करेंगे चर्चा की शुरुआत
Parliament Debate on Naxalism: संसद में 31 मार्च को नक्सलवाद खात्मे पर चर्चा, कई माओवादी नेता आत्मसमर्पण कर चुके हैं।
Parliamentary Debate on Naxalism || Image- Symbolic (Canva)
- संसद में नक्सलवाद खात्मे पर बड़ी चर्चा
- कई माओवादी नेता हथियार छोड़कर लौटे
- छत्तीसगढ़ में माओवादी संगठन नेतृत्वहीन
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़, ओड़िशा, झारखंड, एमपी और महाराष्ट्र समेत कई अन्य राज्यों में प्रतिबंधित वामपंथी उग्रवाद यानी नक्सलवाद के खात्मे की डेडलाइन तय की थी। (Parliament Debate on Naxalism) केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा था कि उनकी सरकार सशस्त्र माओवादी को जड़ से उखाड़ फेंकने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने डेडलाइन तय करते हुए बताया था कि 31 मार्च 2026 देश में नक्सलवाद का आखिरी दिन होगा।
➡️ दिल्ली : अमित शाह के नक्सल मुक्त भारत के लक्ष्य से पहले संसद में बड़ी चर्चा
➡️लोकसभा में 30 मार्च को नक्सलवाद पर विशेष बहस होगी
➡️सांसद श्रीकांत शिंदे करेंगे बहस की शुरुआत
➡️सरकार के प्रयासों और रणनीति पर होगी अहम चर्चा
➡️देश से नक्सलवाद खत्म करने पर केंद्र सरकार का बड़ा फोकस… pic.twitter.com/IvoFHGYgzp— IBC24 News (@IBC24News) March 28, 2026
सांसद श्रिकांत शिंदे करेंगे चर्चा की शुरुआत
वही अब इसी अहम मुद्दे पर संसद के लोकसभा में सोमवार यानी 30 मार्च को देश को नक्सलवाद से मुक्त करने के प्रयासों पर चर्चा होने वाली है। चर्चा की शुरुआत श्रिकांत शिंदे लोकसभा के नियम 193 के तहत करेंगे। इस मौके पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह समेत भाजपा के सभी संसद सदस्य और विपक्षी दल के नेता संसद में मौजूद होंगे।
बता दें कि पिछले एक वर्ष में कई माओवादी नेता हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौट चुके हैं। हाल ही में सबसे वांटेड माओवादी नेता सुकुरू और उनके चार सहयोगियों ने 25 मार्च को ओड़िशा पुलिस के सामने आत्मसमर्पण किया था। (Parliament Debate on Naxalism) एडीजी (एंटी-नक्सल ऑपरेशन) संजय पांडा ने बताया कि इन माओवादी नेताओं पर कुल ₹66 लाख का इनाम था। उन्होंने कुल पाँच हथियार सरेंडर किए, जिनमें एक AK-47, एक INSAS राइफल और एक सिंगल-शॉट बंदूक शामिल थी।
छत्तीसगढ़ में माओवादी नेतृत्वविहीन
संजय पांडा ने आगे कहा, “अब कंधमाल जिले में माओवादी संख्या बहुत सीमित है, केवल 8–9 लोग बचे हैं। आने वाले दिनों में हम अपने एंटी-नक्सल अभियान को और तेज करेंगे ताकि लक्ष्य तिथि तक परिणाम मिल सके। मैं शेष माओवादी नेताओं से अपील करता हूँ कि वे पुलिस के सामने आत्मसमर्पण करें, और मैं उन्हें सभी surrender नीतियों का लाभ देने का आश्वासन देता हूँ।”
छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में, जो कुख्यात दंडकारण्य जंगल पट्टी का हिस्सा है और नक्सल आंदोलन का प्रमुख केंद्र माना जाता है, वांटेड नक्सली लीडर और डीकेएसजेडसी सदस्य पापा राव और 17 अन्य माओवादी कैडर ने 17 मार्च को आत्मसमर्पण कर दिया था। बता दें कि पापा राव छत्तीसगढ़ में सक्रिय नक्सलियों के सबसे बड़े और अंतिम नेता थे। उनके सरेंडर के साथ ही छत्तीसगढ़ में माओवादी नेतृत्वविहीन हो चुका है। (Parliament Debate on Naxalism) छग के गृहमंत्री विजय शर्मा ने बताया है कि प्रदेश में अब महज नक्सल कैडर की संख्या 35–40 ही रह गई है। वे भी जल्द ही आत्मसमर्पण कर देंगे। इस बाबत आईजी बस्तर पी. सुंदरराज ने भी कहा, “दंडकारण्य में माओवादी आंदोलन के इतिहास में पहली बार यह संगठन प्रभावी रूप से नेतृत्वहीन हो गया है।”
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