नयी दिल्ली, 24 अप्रैल (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने 2023 में संसद की सुरक्षा में सेंध से जुड़े मामले में गिरफ्तार महिला आरोपी नीलम आजाद की जमानत अर्जी पर सुनवाई के लिए बृहस्पतिवार को 29 अप्रैल की तारीख तय की।
न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद और न्यायमूर्ति हरीश वैद्यनाथन शंकर की पीठ ने कहा कि वह आजाद की अर्जी पर मामले में सह-आरोपी मनोरंजन डी की जमानत याचिका के साथ सुनवाई करेगी।
बृहस्पतिवार को संक्षिप्त सुनवाई के दौरान पीठ ने पुलिस से अगली तारीख पर यह स्पष्ट करने को कहा कि क्या ‘स्मोक कैन’ (धुआं छोड़ने वाला स्प्रे), जो जानलेवा नहीं होता, उसे ले जाना या उसका इस्तेमाल करना, आतंकवादी गतिविधियों के संबंध में लागू होने वाले कठोर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के दायरे में आता है।
साल 2001 के संसद हमले की 22वीं बरसी पर 13 दिसंबर 2023 को संसद की सुरक्षा में सेंध लगाते हुए दो आरोपी सागर शर्मा और मनोरंजन डी शून्यकाल के दौरान सार्वजनिक गैलरी से कथित तौर पर लोकसभा कक्ष में कूद गए थे और सदस्यों द्वारा काबू किए जाने से पहले उन्होंने वहां ‘स्मोक कैन’ से पीला धुआं छोड़ा था तथा नारे लगाए थे।
लगभग उसी समय दो अन्य आरोपियों-अमोल शिंदे और नीलम आजाद ने संसद परिसर के बाहर ‘तानाशाही नहीं चलेगी’ के नारे लगाते हुए ‘स्मोक कैन’ से पीला धुआं छोड़ा था।
उच्च न्यायालय ने कहा कि अगर बाजार में आसानी से उपलब्ध ‘स्मोक कैन’ पर यूएपीए लगाया जा सकता है, तो होली पर इसका (स्मोक कैन) इस्तेमाल करने वाले भी इसके (यूएपीए) दायरे में आएंगे और यहां तक कि इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के मैच पर भी यह कानून लागू होगा।
पीठ ने कहा, “आप इस पर जानकारी लें और हमें बताएं…. बाजार में खुलेआम उपलब्ध ‘स्मोक कैन’ पर यूएपीए लागू होता है या नहीं। अगर यह लागू होता है, तो होली पर हर कोई इस अपराध के दायरे में आएगा। हर आईपीएल मैच पर यूएपीए लगेगा।”
आजाद के वकील ने अपनी मुवक्किल को इस आधार जमानत पर रिहा करने का अनुरोध किया था कि मामले में यूएपीए के प्रावधान लागू नहीं होते।
अभियोजन पक्ष ने जमानत अर्जी का विरोध करते हुए दलील दी कि आजाद पर भारत की संप्रभुता और अखंडता को बाधित करने जैसे “गंभीर” आरोप हैं।
भाषा पारुल माधव
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