संसद की सुरक्षा में सेंध का मामला: अदालत ने जमानत याचिका पर पुलिस से जवाब मांगा

संसद की सुरक्षा में सेंध का मामला: अदालत ने जमानत याचिका पर पुलिस से जवाब मांगा

संसद की सुरक्षा में सेंध का मामला: अदालत ने जमानत याचिका पर पुलिस से जवाब मांगा
Modified Date: August 18, 2025 / 05:45 pm IST
Published Date: August 18, 2025 5:45 pm IST

नई दिल्ली, 18 अगस्त (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने दिसंबर 2023 में संसद की सुरक्षा में सेंध लगाने के मामले में दायर एक जमानत याचिका पर सोमवार को पुलिस से जवाब तलब किया।

न्यायमूर्ति विवेक चौधरी और न्यायमूर्ति मनोज जैन की पीठ ने मामले में आरोपी ललित झा की जमानत याचिका पर पुलिस को नोटिस जारी किया और मामले की अगली सुनवायी की तिथि आठ अक्टूबर निर्धारित की।

झा ने निचली अदालत के 28 अप्रैल के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी गई थी। झा ने 15 दिसंबर, 2023 को आत्मसमर्पण करने और तब से 1.8 साल हिरासत में बिताने का दावा किया।

झा की याचिका में कहा गया है, ‘‘मौजूदा स्तर पर मामला आरोपों पर दलील रखे जाने और सीआरपीसी की धारा 207 के अनुपालन के चरण में है। यहां यह उल्लेख करना भी प्रासंगिक है कि मामले में मुख्य आरोपपत्र में 133 गवाह हैं। हालांकि, गवाहों की सूची में संसद के किसी भी सदस्य का नाम शामिल नहीं है।’’

झा ने दलील दी कि सदस्यों को कोई नुकसान, चोट या संपत्ति का नुकसान नहीं हुआ। झा ने दावा किया कि निचली अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज करते समय ‘सही तथ्यों और परिस्थितियों’ पर विचार न करके गलती की।

वर्ष 2001 में संसद पर हुए आतंकी हमले की बरसी पर सुरक्षा में सेंध लगाते हुए सागर शर्मा और मनोरंजन डी. शून्यकाल के दौरान दर्शक दीर्घा से लोकसभा कक्ष में कूद गए थे और उन्होंने पीली गैस छोड़ने के साथ नारे लगाए थे। इसके बाद कुछ सांसदों ने उन्हें काबू कर लिया।

लगभग उसी समय दो अन्य आरोपियों अमोल शिंदे और नीलम आजाद ने संसद परिसर के बाहर रंगीन गैस छोड़ी थी और ‘तानाशाही नहीं चलेगी’ जैसे नारे लगाए थे।

उच्च न्यायालय ने जुलाई में सह-आरोपियों आजाद और महेश कुमावत को ज़मानत दे दी थी।

निचली अदालत ने कहा था कि सभी आरोपी – आजाद, मनोरंजन डी., शर्मा, अमोल धनराज शिंदे, झा और कुमावत – 13 दिसंबर, 2023 को संसद को निशाना बनाने के लिए आतंकवादी गुरपतवंत सिंह पन्नू द्वारा दी गई धमकी के बारे में पहले से ही जानते थे।

चार आरोपियों को मौके से ही हिरासत में ले लिया गया था, जबकि झा और कुमावत को बाद में गिरफ्तार किया गया था।

भाषा अमित वैभव

वैभव


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