संसदीय समिति ने एकलव्य स्कूलों के निर्माण में देरी को लेकर जताई चिंता
संसदीय समिति ने एकलव्य स्कूलों के निर्माण में देरी को लेकर जताई चिंता
नयी दिल्ली, 11 अगस्त (भाषा) संसद की एक समिति ने एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूलों के निर्माण में हो रही देरी पर चिंता जताते हुए कहा है कि इस संबंध में सरकार द्वारा कदम उठाये जाने के बावजूद बार-बार पेश आ रही समस्याओं का समाधान नहीं हुआ है।
सामाजिक न्याय और अधिकारिता संबंधी स्थायी समिति ने अनुदान की मांगों (2026-27) पर अपनी 19वीं रिपोर्ट में दी गई सिफारिशों पर जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा की गई कार्रवाई के बारे में 23वीं रिपोर्ट में यह उल्लेख किया कि 728 लक्षित स्कूलों में से 723 एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूलों को मंजूरी दी गई है।
समिति ने इस बात पर गौर किया कि 2025-26 में 7,088.60 करोड़ रुपये के बजट अनुमान को संशोधित अनुमान के चरण में अत्यधिक घटाकर 4,900 करोड़ रुपये कर दिया गया था। इसलिए, समिति ने मंत्रालय से कहा कि उसे क्रियान्वयन एजेंसियों को नियमों का पालन करने के लिए कहना चाहिए ताकि स्कूल तय समय-सीमा के भीतर स्थापित किए जा सकें।
समिति ने यह भी कहा था कि 2026-27 के लिए 7,150.01 करोड़ रुपये के बजट अनुमान को संशोधित अनुमान के चरण में कम नहीं किया जाना चाहिए, जैसा कि हर साल किया जाता है।
समिति ने कहा कि उसे खुशी है कि राष्ट्रीय आदिवासी छात्र शिक्षा समिति ने 2025-26 में 4,896.40 करोड़ रुपये के संशोधित अनुमान का उपयोग किया, लेकिन वह ‘‘मंत्रालय के जवाब से संतुष्ट नहीं’’ है।
समिति ने कहा कि ये समस्याएं बनी हुई हैं, क्योंकि एकलव्य मॉडल स्कूलों के निर्माण और उनमें पठन-पाठन शुरू करने में तेजी लाने के लिए मंत्रालय की ओर से उठाए गए कदम दोहराव वाले हैं।
समिति का मानना है कि मंत्रालय को कोई विकल्प तैयार करना चाहिए क्योंकि कुछ समस्याएं बार-बार आ रही हैं। इस संबंध में उठाये गए कदमों से ये समस्याएं हल नहीं हो पाई हैं।
नतीजतन, मंजूर किये गए 728 एकलव्य स्कूलों में से अब तक केवल 428 ही पूरे हो पाए हैं। 249 जगहों पर निर्माण कार्य चल रहा है और 51 स्कूल अब भी निर्माण-पूर्व चरण में हैं।
समिति ने यह सिफारिश की है कि मंत्रालय निर्माण कार्यों को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए आवश्यक कदम उठाए, ताकि स्कूल अपने भवनों में संचालित हो सकें।
भाषा सुभाष अविनाश
अविनाश

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