नयी दिल्ली, 24 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सहित अन्य वादियों से कहा कि वे पश्चिम बंगाल में जारी मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया से संबंधित अपनी शिकायतों को कलकत्ता उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखें।
पश्चिम बंगाल में विवादों से घिरी एसआईआर प्रक्रिया का जिक्र करते हुए प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने कहा कि इस राज्य को छोड़कर पूरे देश में यह प्रक्रिया सुचारु रूप से संपन्न हुई है।
प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘‘फिलहाल (अन्य राज्यों में) शायद ही कोई मुकदमेबाजी है। मुझे लगता है कि कुछ राज्य ऐसे हैं जहां एसआईआर के बाद (हटाए जाने की) दर अधिक है।’’
कई याचिकाओं की सुनवाई करते हुए पीठ ने कहा कि उठाए गए कई मुद्दे प्रशासनिक प्रकृति के हैं और उनका निपटारा कलकत्ता उच्च न्यायालय द्वारा किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने न्यायालय के 10 मार्च के उस आदेश का हवाला दिया जिसमें पुनरीक्षण प्रक्रिया से उत्पन्न दावों और आपत्तियों के निपटान के लिए एक ढांचा निर्धारित किया गया था।
उन्होंने समयसीमा से संबंधित मुद्दों को उठाया, यह देखते हुए कि मतदान से सात दिन पहले मतदाता सूचियों को फ्रीज करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि कई उम्मीदवार जिनके नाम विचाराधीन हैं, निर्धारित समय सीमा के भीतर नामांकन दाखिल करने में असमर्थ हो सकते हैं।
वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने कहा कि मतदाताओं की पूरी पूरक सूची अभी तक उपलब्ध नहीं कराई गई है और उन्होंने सुझाव दिया कि जांच में सुविधा के लिए राजनीतिक दलों को इसकी ‘सॉफ्ट कॉपी’ उपलब्ध कराई जाए।
निर्वाचन आयोग की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता दामा शेषाद्री नायडू ने कहा कि निर्वाचन आयोग दैनिक आधार पर पूरक सूचियां प्रकाशित करने को तैयार है।
न्यायालय ने मतदाता सूचियों को फ्रीज करने की समयसीमा बढ़ाने की मांग करने वाली याचिकाओं पर भी ध्यान दिया और कहा कि वह इस पर विचार कर सकता है।
भाषा संतोष नरेश
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