Middle East Tension: ट्रंप की पहल से टला बड़ा टकराव? बेरूत नहीं जाएगी इजराइल सेना, ईरान की धमकी के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने नेतन्याहू को घुमाया फोन

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ट्रंप की पहल से टला बड़ा टकराव? बेरूत नहीं जाएगी इजराइल सेना, Middle East Tensions Trump Latest News

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  • Publish Date - June 2, 2026 / 12:11 AM IST,
    Updated On - June 2, 2026 / 12:12 AM IST

Middle East Tension. Image Source- IBC24

वॉशिंगटन/तेहरान/तेल अवीव। Middle East Tension: पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच युद्धविराम और कूटनीतिक समाधान की उम्मीदों को उस समय झटका लगा था, जब इजरायल ने लेबनान में सैन्य कार्रवाई का दायरा बढ़ा दिया। ईरान ने अमेरिका से बात करने से इनकार कर दिया और होर्मुज खाड़ी बंद करने की धमकी दे दी। हालांकि अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्तक्षेप के बाद हालात में कुछ नरमी आने के संकेत मिले हैं। ट्रंप ने दावा किया है कि इजरायल और हिज्बुल्लाह दोनों पक्ष गोलीबारी रोकने पर सहमत हुए हैं तथा बेरूत की ओर बढ़ रही इजरायली सेना को भी वापस बुला लिया गया है।

Middle East Tension: क्षेत्रीय तनाव के केंद्र में ईरान का परमाणु कार्यक्रम और लेबनान में इजरायल-हिज्बुल्लाह संघर्ष बना हुआ है। ईरान लंबे समय से अमेरिका के साथ अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर विवाद में है। हाल के दिनों में मध्यस्थ देशों के जरिए दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी थी, जिससे किसी समझौते की संभावना जताई जा रही थी। लेकिन लेबनान में इजरायली सैन्य गतिविधियों के विस्तार ने इन प्रयासों को प्रभावित किया।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि उन्हें ईरान की ओर से बातचीत बंद करने संबंधी कोई आधिकारिक संदेश नहीं मिला है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि दोनों पक्ष काफी बातचीत कर चुके हैं और अब कुछ समय के लिए चुप्पी बेहतर हो सकती है। वहीं, सीएनबीसी से बातचीत में ट्रंप ने स्पष्ट किया कि यदि ईरान होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकी को अमल में लाता है तो भी अमेरिका तेल कीमतों को लेकर चिंतित नहीं है। ट्रंप ने यह भी दावा किया कि उनकी इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से सकारात्मक बातचीत हुई, जिसके बाद इजरायल ने बेरूत की ओर बढ़ रही अपनी सैन्य टुकड़ियों को रोकने का निर्णय लिया। उनके अनुसार, अमेरिकी प्रतिनिधियों ने हिज्बुल्लाह से भी संपर्क किया और दोनों पक्षों के बीच संघर्ष को सीमित करने पर सहमति बनी है।

दरअसल, हाल के दिनों में इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में बड़े पैमाने पर सैन्य अभियान चलाया है। इसे पिछले करीब 25 वर्षों में लेबनान के भीतर इजरायल की सबसे बड़ी सैन्य घुसपैठ माना जा रहा है। इस दौरान इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में स्थित ऐतिहासिक ब्यूफोर्ट किले पर भी नियंत्रण स्थापित कर लिया। रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण यह किला लगभग 700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और वहां से दक्षिणी लेबनान तथा उत्तरी इजरायल के बड़े हिस्से पर नजर रखी जा सकती है।

इजरायल का कहना है कि उसकी कार्रवाई का उद्देश्य हिज्बुल्लाह की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है। दूसरी ओर, लेबनान के प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने इजरायल पर नागरिक क्षेत्रों को निशाना बनाने और व्यापक तबाही फैलाने का आरोप लगाया है। लेबनानी अधिकारियों के अनुसार संघर्ष में हजारों लोगों की जान जा चुकी है और बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं। हालांकि ट्रंप के हस्तक्षेप के बाद तत्काल तनाव कम होने की उम्मीद जगी है, लेकिन क्षेत्र में स्थायी शांति की राह अब भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान, इजरायल, अमेरिका और हिज्बुल्लाह से जुड़े जटिल समीकरणों का समाधान केवल सैन्य नहीं, बल्कि व्यापक कूटनीतिक प्रयासों से ही संभव है।