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नयी दिल्ली, 21 जून (भाषा) एक यात्री संगठन और कांगड़ा घाटी के कई स्थानीय यात्रियों ने रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से पठानकोट-बैजनाथ मार्ग पर केवल दो जोड़ी ट्रेनों के बजाय सभी सात जोड़ी ट्रेनों को बहाल करने का आग्रह किया है, ताकि दैनिक स्तर पर लोगों की भारी भीड़ और यात्रियों के लिए असुरक्षित यात्रा से उत्पन्न खतरे को कम किया जा सके।
बाढ़ और भूस्खलन के कारण हुए भारी नुकसान के बाद इस ऐतिहासिक 164 किलोमीटर लंबी नैरो-गेज लाइन पर परिचालन लगभग चार साल तक निलंबित रहा था। ट्रेन सेवाएं बंद होने से पहले, इस मार्ग पर सात जोड़ी ट्रेनें चलती थीं, जो पठानकोट और बैजनाथ पपरोला के बीच लगभग 20 कस्बों के दैनिक यात्रियों को महत्वपूर्ण कनेक्टिविटी प्रदान करती थीं।
रेलवे अधिकारियों ने कहा, ‘‘अगस्त 2022 में हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश और बाढ़ के कारण चक्की नदी पर ब्रिटिश काल का पुल संख्या 32 बह गया था। इसके अलावा, मानसून के दौरान भूस्खलन से ट्रैक को व्यापक नुकसान हुआ था। सुरक्षा कारणों से यात्री सेवाओं को अस्थायी रूप से निलंबित करना पड़ा था। अब, हमने दो ट्रेनों की सेवाएं बहाल कर दी हैं और अन्य ट्रेनों को भी चरणबद्ध तरीके से बहाल किया जाएगा।’’
चार साल बाद दो जून को ट्रेन संचालन फिर से शुरू हुआ, जिसमें सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने अन्य नेताओं के साथ दो ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
एक दिन बाद, पठानकोट और नूरपुर के बीच तीसरी ट्रेन की बहाली ने उम्मीदें जगाईं कि शेष चार जोड़ी ट्रेनें भी फिर से शुरू हो जाएंगी। हालांकि, 10 जून को उत्तर रेलवे ने परिचालन बाधाओं और आवश्यक रखरखाव कार्य का हवाला देते हुए तीसरी ट्रेन को रद्द कर दिया।
कांगड़ा घाटी रेलवे संघर्ष समिति के अध्यक्ष पी सी विश्वकर्मा ने कहा, ‘‘तब से, जम्मू मंडल के साथ-साथ रेलवे बोर्ड के वरिष्ठ रेलवे अधिकारियों ने शेष पांच जोड़ी ट्रेनों की सेवाएं बहाल करने के सवाल पर चुप्पी साध रखी है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘वर्तमान में चल रही दो ट्रेनों में अत्यधिक भीड़ होती है और भारी भीड़ के कारण यात्री अक्सर कोच के दरवाजों पर खड़े होकर यात्रा करने को मजबूर होते हैं, जिससे उनकी जान जोखिम में पड़ जाती है। चूंकि यह एक नैरो-गेज ट्रैक है, इसलिए प्रत्येक ट्रेन में केवल छह कोच होते हैं।’’
विश्वकर्मा ने कहा कि दोनों ट्रेनों के प्रस्थान का समय बेहद असुविधाजनक है। एक ट्रेन सुबह पांच बजे और दूसरी सुबह करीब सात बजे पठानकोट से चलती है, दोनों दोपहर में बैजनाथ पपरोला पहुंचती हैं।
वापसी यात्रा में, एक अपराह्न दो बजे और दूसरी अपराह्न करीब 3.30 बजे रवाना होती है, जो क्रमशः रात लगभग नौ बजे और 11 बजे पठानकोट पहुंचती है।
जहां रेलवे ने शेष पांच जोड़ी ट्रेनों को बहाल न करने के लिए परिचालन बाधाओं और आवश्यक रखरखाव कार्य का हवाला दिया है, वहीं स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि राजनीति सहित अन्य कारक सेवाओं को फिर से शुरू करने में देरी कर रहे हैं।
पठानकोट के एक वरिष्ठ निवासी ने कहा कि रेलवे अधिकारियों ने उन्हें बताया था कि लोको पायलटों और अन्य कर्मचारियों की कमी इस देरी के पीछे मुख्य कारण थी।
हालांकि, विश्वकर्मा ने आरोप लगाया कि पठानकोट के प्रभावशाली राजनेताओं ने सभी ट्रेन सेवाओं को बहाल करने का विरोध किया था क्योंकि ट्रेनें चार. पांच समपार फाटकों (लेवल क्रॉसिंग) पर सड़क यातायात को रोकती हैं।
भाषा
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