लोगों ने शहादरा में आग से लोगों की मौत के लिए संकरी गलियों, बेतरतीब पार्किंग को जिम्मेदार ठहराया

Ads

लोगों ने शहादरा में आग से लोगों की मौत के लिए संकरी गलियों, बेतरतीब पार्किंग को जिम्मेदार ठहराया

  •  
  • Publish Date - October 18, 2024 / 06:29 PM IST,
    Updated On - October 18, 2024 / 06:29 PM IST

नयी दिल्ली, 18 अक्टूबर (भाषा) दिल्ली के शहादरा में लगी आग के बाद अग्निशमन कार्रवाई में देरी के लिए स्थानीय निवासियों ने संकरी गलियों और वाहनों को बेतरतीब तरीके से खड़े करने को जिम्मेदार ठहराया।

पूर्वी दिल्ली के भोलानाथ नगर में शुक्रवार सुबह चार मंजिला इमारत की तीसरी और चौथी मंजिल पर लगी आग में एक महिला और उसके बेटे की मौत हो गई।

स्थानीय लोगों का कहना है कि मौत की वजह देर से दमकल वाहनों का मौके पर पहुंचना है।

एक दमकल कर्मी ने ‘पीटीआई-भाषा’को बताया कि दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) को सुबह पांच बजकर 24 मिनट पर ऑपात कॉल आया और सूचना मिलने के कुछ मिनटों के बाद ही दमकल वाहन मौके पर रवाना कर दिए गए। उन्होंने स्वीकार किया कि संकरी गलियों और वाहनों की बेतरतीब पार्किंग की वजह से दमकल वाहनों के मौके पर पहुंचने में काफी देरी हुई।

हादसे में घायल हुए परिवार के कई सदस्यों में से एक कैलाश गुप्ता के रिश्तेदार हरिओम गुप्ता ने कहा, ‘‘मेरे परिवार के सदस्यों की मौत का अहम कारण देरी है।’’

हरिओम ने कहा कि दमकल वाहन घर के बहुत करीब थे लेकिन संकरी गली होने और पूरे रास्ते कार पार्क होने की वजह से उन्हें मौके पर पहुंचने का रास्ता नहीं मिला। उन्होंने बताया, ‘‘बड़े दमकल वाहनों को वापस भेजना पड़ा जबकि छोटे वाहनों को मौके पर पहुंचने में 20 मिनट से अधिक का समय लगा।’’

इस हादसे में 42 वर्षीय एक महिला और उसके 16 वर्षीय बेटे की मौत हो गई। प्रथम दृष्टया आग एसी में शार्ट सर्किट के कारण प्रतीत होती है।

एक पुलिस अधिकारी ने बताया, ‘‘शिल्पी गुप्ता और उसके बेटे प्रणव गुप्ता का शव जली हुई हालत में घर से बरामद किया गया है।’’

उन्होंने बताया कि शिल्पी के परिवार के चार सदस्यों कैलाश गुप्ता (72), उनकी पत्नी भगवती गुप्ता (70), उनके बेटे मनीष गुप्ता (45), मनीष गुप्ता का बेटा पार्थ (19) का जीटीबी अस्पताल में इलाज चल रहा है और मनीष की हालत गंभीर बनी हुई है।

डीएफएस के अधिकारी ने बताया कि सूचना मिलते ही छह दमकल वाहनों को मौके पर रवाना किया गया और आग को नियंत्रित करने में करीब दो घंटे का समय लगा।

इमारत की चौथी मंजिल पर घटना के समय मौजूद नाबालिग छात्रा आर्ची ने बताया कि उसने सुना लोग बाहर चिल्ला रहे हैं और घना धुंआ फैला हुआ था। उसने बताया, ‘‘मैं और मेरा भाई छत पर भागे। हमने अपनी जान बचाने के लिए बगल की छत पर छलांग लगा दी।’’

आर्ची ने बताया कि घर तक पहुंचने में दमकल विभाग की टीम को एक घंटे से अधिक का समय लगा।

शुरुआती जांच के मुताबिक घना धुंआ छा जाने की वजह से परिवार के सदस्य इमारत से बाहर नहीं निकल पाए।

एक पुलिस अधिकारी ने बताया, ‘‘हमारी अपराध अन्वेषण एवं फॉरेंसिक टीम इमारत में गई है ताकि आग लगने के वास्तविक कारण का पता लगाया जा सके।’’

भाषा धीरज माधव

माधव