तृणमूल सरकार की प्रतिशोध की राजनीति का खामियाजा बंगाल की जनता भुगत रही : भाजपा

Ads

तृणमूल सरकार की प्रतिशोध की राजनीति का खामियाजा बंगाल की जनता भुगत रही : भाजपा

  •  
  • Publish Date - February 4, 2026 / 01:29 PM IST,
    Updated On - February 4, 2026 / 01:29 PM IST

( तस्वीर सहित )

नयी दिल्ली, चार फरवरी (भाषा) केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही जन कल्याण की योजनाओं को पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस द्वारा लागू न किए जाने का दावा करते हुए राज्यसभा में बुधवार को भारतीय जनता पार्टी के सामिक भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि प्रतिशोध की राजनीति का खामियाजा राज्य की आम जनता भुगत रही है।

शून्यकाल में यह मुद्दा उठाते हुए उच्च सदन में भट्टाचार्य ने कहा कि पश्चिम बंगाल की सरकार केंद्र सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को राज्य में लागू नहीं कर रही है जिससे वहां के लोग परेशान हैं।

उन्होंने कहा ‘‘प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के लिए राज्य में साढ़े सात लाख आवेदक हैं लेकिन योजना लागू नहीं की जा रही है। पश्चिम बंगाल देश में एकमात्र राज्य है जहां ‘आयुष्मान भारत योजना’ लागू नहीं है। किसान फसल बीमा योजना भी राज्य में लागू नहीं की गई है।’’

भट्टाचार्य ने दावा किया कि पीएम सूर्य घर योजना के आवेदकों की संख्या भी कम नहीं है लेकिन राज्य में यह योजना लागू ही नहीं की गई और स्मार्ट सिटी योजना से भी तृणमूल सरकार ने पश्चिम बंगाल को वंचित रखा।

उन्होंने कहा कि तृणमूल सरकार के इस रवैये से राज्य के गरीब और हाशिए पर रहने वाले लोग कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से वंचित हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार कई केंद्रीय कल्याणकारी योजनाओं को जानबूझकर रोक रही है, जो देश की संघीय व्यवस्था पर सीधा हमला है।

भट्टाचार्य ने यह भी आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने प्रतिशोध की राजनीति के तहत लगभग 43 रेलवे परियोजनाओं को रोक रखा है।

उन्होंने राज्य की तृणमूल सरकार पर लोकतांत्रिक व्यवस्था की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि प्रतिशोध की राजनीति का खामियाजा राज्य की आम जनता भुगत रही है।

भट्टाचार्य ने दावा किया कि राज्य में न्यायपालिका पर भी हमले हुए हैं और तृणमूल सरकार केवल विरोध के लिए विरोध कर रही है, जिससे गरीबों, किसानों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों को योजनाओं के लाभ से वंचित किया जा रहा है।

इस दौरान तृणमूल कांग्रेस के सदस्यों ने विरोध जताते हुए सदन में नारेबाजी की।

भाषा मनीषा माधव

माधव