पश्चिम बंगाल में मताधिकार से वंचित लोगों के विस्तृत ब्यौरे की मांग को लेकर न्यायालय में याचिका दायर

पश्चिम बंगाल में मताधिकार से वंचित लोगों के विस्तृत ब्यौरे की मांग को लेकर न्यायालय में याचिका दायर

पश्चिम बंगाल में मताधिकार से वंचित लोगों के विस्तृत ब्यौरे की मांग को लेकर न्यायालय में याचिका दायर
Modified Date: June 1, 2026 / 08:31 pm IST
Published Date: June 1, 2026 8:31 pm IST

नयी दिल्ली, एक जून (भाषा) पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के कारण मताधिकार से वंचित हुए मतदाताओं का विधानसभा क्षेत्रवार विस्तृत ब्योरा सार्वजनिक करने की मांग को लेकर उच्चतम न्यायालय में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई है।

यह याचिका पश्चिम बंगाल प्रदेश कांग्रेस कमेटी की एसआईआर समिति के अध्यक्ष प्रसेनजीत बोस ने दायर की है। उन्होंने निर्वाचन आयोग, पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और राज्य सरकार को मतदाता सूची के पुनरीक्षण से संबंधित विस्तृत आंकड़े सार्वजनिक करने का निर्देश देने की मांग की है।

कांग्रेस नेता बोस ने अधिवक्ता नेहा राठी के माध्यम से यह याचिका दायर की है। उच्चतम न्यायालय ने हाल ही में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण कराने तथा इसके लिए अपनाई गई प्रक्रिया संबंधी निर्वाचन आयोग की शक्तियों को बरकरार रखा था।

प्रधान न्यायाधीश(सीजेआई) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने आयोग के इस अधिकार को वैध ठहराते हुए कहा था कि आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं है।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि विधानसभा चुनावों से ठीक पहले राज्य में कराए गए एसआईआर का चुनाव परिणामों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ा, जिसमें भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की।

याचिका में कहा गया है, ‘‘पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणामों के विधानसभा क्षेत्रवार विश्लेषण से पता चलता है कि वर्ष 2026 में भाजपा द्वारा जीती गई 207 सीटों में से 82 विधानसभा क्षेत्रों में एसआईआर के दौरान किए गए परिवर्तनों ( जिनमें नामों को हटाना और जोड़ना शामिल है) की संख्या जीत के अंतिम अंतर से अधिक थी।’’

इसमें उल्लेख किया गया है कि इन 82 निर्वाचन क्षेत्रों में से 70 निर्वाचन क्षेत्र मुस्लिम बहुल 12 जिलों में स्थित हैं। गौरतलब है कि 2021 में भाजपा ने इनमें से केवल नौ निर्वाचन क्षेत्रों में ही जीत हासिल की थी।

इसमें कहा गया है, ‘‘उपलब्ध आंकड़े संकेत देते हैं कि एसआईआर से जुड़े परिवर्तनों का इन 82 विधानसभा क्षेत्रों के चुनाव परिणामों पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है।’’

याचिका में निर्वाचन आयोग, पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी और राज्य सरकार को पक्षकार बनाया गया है तथा उन्हें यह खुलासा करने का निर्देश देने की मांग की गई है कि एसआईआर के दौरान और उसके बाद के चरणों में प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में फॉर्म-6 और फॉर्म-7 के कितने आवेदन प्राप्त हुए, स्वीकार किए गए या खारिज किए गए तथा अपीलीय न्यायाधिकरणों के समक्ष कितने मामले लंबित हैं।

उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल की 294 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा ने 207 सीटें जीतकर दो-तिहाई से अधिक बहुमत हासिल किया था और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के 15 वर्षों के शासन का अंत किया था।

याचिका के अनुसार, पश्चिम बंगाल में एसआईआर की गणना प्रक्रिया के दौरान 58 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से बाहर कर दिए गए।

इसमें कहा गया है कि दावे और आपत्तियों के चरण में नाम जोड़ने के लिए 9.64 लाख आवेदन तथा नाम हटाने के लिए 99,118 आवेदन प्राप्त हुए थे, लेकिन 28 फरवरी, 2026 को प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में केवल 1.82 लाख नए नाम ही जोड़े गए।

याचिका में कहा गया, ‘‘इस प्रकार के आंकड़ों का खुलासा न किया जाना मतदाता सूची के एसआईआर प्रक्रिया की पारदर्शिता, जवाबदेही और सार्वजनिक निगरानी को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा करता है।’’

याचिका में कहा गया है कि उच्चतम न्यायालय के आदेशों के अनुपालन में मतदाता सूची में नाम जोड़े जाने या हटाए जाने से संबंधित विवादों की सुनवाई के लिए 19 अपीलीय न्यायाधिकरण गठित किए गए थे, लेकिन सात अप्रैल को तीन सदस्यीय न्यायिक समिति द्वारा तैयार मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) सार्वजनिक नहीं की गई।

याचिका में दावा किया गया है कि अपील दाखिल करने, सुनवाई की प्रक्रिया, नोटिस जारी करने और मामलों के निस्तारण की समय-सीमा संबंधी सार्वजनिक दिशानिर्देशों के अभाव में विशेष रूप से गरीब और हाशिए पर रहने वाले मतदाताओं के लिए प्रक्रियागत अनिश्चितता पैदा हुई है।

इसमें आधिकारिक आंकड़ों और मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया है कि न्यायाधिकरणों के समक्ष दायर लगभग 25 लाख अपीलों में से मई के मध्य तक केवल एक छोटे हिस्से का ही निस्तारण हो पाया था।

याचिका में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, 14 मई तक निस्तारित 6,581 अपीलों में से 4,043 को स्वीकार कर लिया गया था।

याचिका में कहा गया है कि निर्वाचन आयोग द्वारा सात अप्रैल को जारी आंकड़ों के अनुसार, पश्चिम बंगाल में विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद लगभग 91 लाख मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए थे।

हालांकि, 28 फरवरी को जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष नवंबर में एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने के बाद से 63.66 लाख नाम हटाए गए, जो कुल मतदाता संख्या का लगभग 8.3 प्रतिशत है। इसके परिणामस्वरूप राज्य में मतदाताओं की संख्या लगभग 7.66 करोड़ से घटकर 7.04 करोड़ से कुछ अधिक रह गई।

भाषा रवि कांत दिलीप

दिलीप


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