नयी दिल्ली, चार अगस्त (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को उस जनहित याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें अनुसूचित जनजाति (एसटी) क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले शहरी इलाकों में नगरपालिकाएं गठित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था।
शीर्ष अदालत ने कहा कि यह मुद्दा विधायिका के अधिकार क्षेत्र में आता है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी मोहना की पीठ ने याचिका दायर करने वाले भारत आदिवासी पार्टी (बीएपी) के सांसद राजकुमार रोत को संबंधित मंत्रालय से संपर्क करने को कहा।
पीठ ने सुझाव दिया कि रोत लोकसभा में निजी सदस्य विधेयक पेश करके भी इस मुद्दे को आगे बढ़ा सकते हैं।
बांसवाड़ा से लोकसभा सदस्य रोत ने अपनी याचिका में दलील दी थी कि तेजी से हो रहे शहरीकरण और जनसांख्यिकीय बदलाव ने अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों में बसी कई बस्तियों का स्वरूप बदल दिया है, लेकिन वे नगरपालिका प्रशासन के दायरे से बाहर हैं।
उन्होंने कहा था कि अनुसूचित जनजाति क्षेत्रों में लगातार बरकरार विधायी या प्रशासनिक खालीपन का शहरी निर्णय-प्रक्रियाओं में प्रभावी ढंग से हिस्सा लेने की वहां के निवासियों की क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
भाषा पारुल सुरेश
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