सोशल मीडिया मंचों पर ‘लगातार स्क्रॉल’ और ‘ऑटोप्ले’ जैसी सुविधाओं के खिलाफ जनहित याचिका दायर

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सोशल मीडिया मंचों पर ‘लगातार स्क्रॉल’ और ‘ऑटोप्ले’ जैसी सुविधाओं के खिलाफ जनहित याचिका दायर

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  • Publish Date - September 9, 2026 / 08:54 PM IST,
    Updated On - September 9, 2026 / 08:54 PM IST

नयी दिल्ली, नौ सितंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई है, जिसमें सोशल मीडिया मंच के उपयोगकर्ताओं को अधिक समय तक जोड़े रखने और लत पैदा करने वाली लगातार ‘स्क्रॉल’ और ‘ऑटोप्ले’ जैसी डिजाइन सुविधाओं की जांच के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने का अनुरोध किया गया है।

जनहित याचिका पर मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ के समक्ष सुनवाई हुई।

हालांकि, न्यायमूर्ति करिया ने याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। अब इस मामले की सुनवाई अगले सप्ताह किसी अन्य पीठ के समक्ष होगी।

बीएमएल मुंजाल विश्वविद्यालय में कानून के प्रोफेसर एवं याचिकाकर्ता विकास कथूरिया ने कहा कि मुद्दे का केंद्र यह नहीं है कि सोशल मीडिया मंच पर किस तरह की सामग्री उपलब्ध है, बल्कि यह है कि इन मंच को किस तरह डिजाइन किया गया है कि वे उपयोगकर्ताओं को ‘इन्फाइानइट स्क्रॉल’, ऑटोप्ले और एल्गोरिदम द्वारा चुने एवं व्यक्तिगत पंसद अनुरूप बनाए गए फीड के जरिये बार-बार उनका ध्यान अपनी ओर खींचते हैं।

याचिका में कहा गया कि भारत के संदर्भ में यह चिंता और महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि आंकड़ों के अनुसार 18 से 24 वर्ष की आयु के भारतीय युवा रोजाना औसतन 120 मिनट से अधिक समय सोशल मीडिया पर बिताते हैं।

अधिवक्ताओं कार्तिका शर्मा, हर्षा साधवानी और सुभिका जोशी के माध्यम से दायर याचिका में कहा गया कि चिकित्सकीय रूप से यह साबित हो चुका है कि सोशल मीडिया पर लंबे समय तक समय बिताये जाने का संबंध किशोरों में आत्महत्या और अवसाद से जुड़ा है।

याचिका में केंद्र सरकार और राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) को लगातार स्क्रॉल, ऑटोप्ले, एल्गोरिदम द्वारा तैयार फीड और लगातार आने वाले नोटिफिकेशन के इस्तेमाल को सीमित करने, प्रतिबंधित करने या विनियमित करने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।

भाषा

शफीक पवनेश

पवनेश