वित्त वर्ष 2024-25 में ‘पीएम केयर्स’ का घरेलू चंदा 30 प्रतिशत घटकर 479 करोड़ रुपये हुआ

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वित्त वर्ष 2024-25 में ‘पीएम केयर्स’ का घरेलू चंदा 30 प्रतिशत घटकर 479 करोड़ रुपये हुआ

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  • Publish Date - August 18, 2026 / 06:46 PM IST,
    Updated On - August 18, 2026 / 06:46 PM IST

नयी दिल्ली, 18 अगस्त (भाषा) वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान ‘पीएम केयर्स’ को मिलने वाले घरेलू चंदे में 30 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गयी और यह 479 करोड़ रुपये रह गया, जबकि विदेशी चंदा 18 प्रतिशत गिरावट के साथ 92.8 लाख रुपये हो गया। ‘पीएम केयर्स फंड’ की ऑडिट रिपोर्ट में यह जानकारी दी गयी है।

‘पीएम केयर्स फंड’ (प्रधानमंत्री नागरिक सहायता एवं आपातकालीन राहत कोष) में 31 मार्च 2025 को कुल 8,452 करोड़ रुपये थे, जबकि एक साल पहले यह राशि 7,173 करोड़ रुपये थी।

रिपोर्ट के अनुसार, इसमें से 7,846 करोड़ रुपये सावधि जमा में और 605 करोड़ रुपये बचत खाता में रखे गए थे।

वित्त वर्ष 2023-24 में ‘पीएम केयर्स’ कोष को मिला घरेलू चंदा 681.8 करोड़ रुपये था, जबकि उसे कुल 1.13 करोड़ रुपये का विदेशी चंदा मिला था।

इस कोष ने 2024-25 के दौरान ‘पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रेन स्कीम’ पर 87.8 लाख रुपये खर्च किये हैं, जो इससे एक साल पहले के 15.37 करोड़ रुपये के मुकाबले काफी कम है।

वर्ष 2024-25 के दौरान कुल भुगतान 87.85 लाख रुपये था, जबकि उससे पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 15.6 करोड़ रुपये का था।

‘पीएम केयर्स’ की ऑडिट रिपोर्ट के अध्ययन से पता चलता है कि स्वैच्छिक घरेलू चंदा 2020-21 में सबसे ज़्यादा 7,184 करोड़ रुपये था, जो 2021-22 में घटकर 1,896 करोड़ रुपये हो गया और 2022-23 में और अधिक घटकर 909 करोड़ रुपये रह गया।

रिपोर्ट के अनुसार, विदेशी चंदे में तेज़ी से गिरावट आई है। वित्त वर्ष 2020-21 में यह 495 करोड़ रुपये के उच्चतम स्तर पर था, लेकिन अगले दो वर्षों में गिरकर क्रमशः 40 करोड़ रुपये और 2.57 करोड़ रुपये रह गया। अब विदेशी योगदान 92.8 लाख रुपये है, जो 2019-20 के पहले वर्ष में दर्ज 39.7 लाख रुपये के बाद दूसरा सबसे निचला स्तर है।

नरेन्द्र मोदी सरकार ने पीएम केयर्स फंड की स्थापना मुख्य रूप से किसी भी प्रकार की आपातकालीन या संकटपूर्ण स्थिति (जैसे कोविड महामारी) से निपटने और प्रभावित लोगों को राहत प्रदान करने के उद्देश्य से की थी। इसे एक सार्वजनिक धर्मार्थ ट्रस्ट के रूप में पंजीकृत किया गया था।

प्रधानमंत्री इस कोष के पदेन अध्यक्ष होते हैं; यह कोष पूरी तरह से स्वैच्छिक चंदे से चलता है और इसे कोई बजटीय सहायता नहीं मिलती है।

भाषा

सुरेश अविनाश

अविनाश