प्रधानमंत्री मोदी स्वदेशी रूप से निर्मित तीन नौसैनिक जहाजों को सेवा में शामिल करेंगे
प्रधानमंत्री मोदी स्वदेशी रूप से निर्मित तीन नौसैनिक जहाजों को सेवा में शामिल करेंगे
कोलकाता, 19 जून (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वदेशी रूप से निर्मित तीन नौसैनिक जहाजों को रविवार को भारतीय नौसेना में शामिल करेंगे। शुक्रवार को एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि ये जहाज समुद्री युद्ध, जल-मापी (हाइड्रोग्राफिक) सर्वेक्षण और पनडुब्बी-रोधी लड़ाई जैसी अहम अभियानगत क्षमताओं को मजबूती प्रदान करेंगे।
बयान के मुताबिक, मोदी कोलकाता में श्यामा प्रसाद मुखर्जी बंदरगाह पर आयोजित कार्यक्रम में स्वदेशी रूप से निर्मित तीन जहाजों-दूनागिरी, संशोधक और अग्रय-को भारतीय नौसेना में शामिल करेंगे।
बयान के अनुसार, भारतीय नौसेना के ‘वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो’ की ओर से डिजाइन किए गए और कोलकाता स्थित सार्वजनिक उपक्रम ‘गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) लिमिटेड’ द्वारा बनाए गए तीनों जहाज समुद्री युद्ध, जल मापी (हाइड्रोग्राफिक) सर्वेक्षण और पनडुब्बी-रोधी लड़ाई जैसी अहम अभियानगत क्षमताओं को बढ़ावा देंगे।
बयान में कहा गया है, ”बयान में कहा गया है कि ये सभी पहलें मिलकर क्षमता विकास के प्रति नौसेना के संतुलित दृष्टिकोण को दर्शाती हैं। इनके माध्यम से गहरे समुद्र में परिचालन क्षमता सुदृढ़ होगी, समुद्री क्षेत्र में निगरानी और स्थिति संबंधी जागरूकता बढ़ेगी तथा बदलते खतरों के बीच तटीय जलक्षेत्र की सुरक्षा मजबूत होगी। ”
इसमें कहा गया है कि ‘दूनागिरी’ प्रोजेक्ट 17ए के तहत विकसित स्टील्थ जंगी जहाज है, जो अत्याधुनिक हथियारों और सेंसर से लैस है, जिसमें ब्रह्मोस सतह-से-सतह पर मार करने वाली मिसाइल और मध्यम-दूरी की सतह-से-हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणालयां शामिल हैं, जो नौसेना की युद्ध क्षमता को काफी बढ़ाती हैं।
बयान के मुताबिक, ‘संशोधक’ एक सर्वे जहाज है, जिसे तटीय क्षेत्रों और गहरे पानी में जल-मापी सर्वेक्षण करने और रक्षा एवं नागरिक कार्यों के लिए समुद्र-विज्ञान तथा भू-भौतिकीय डेटा जुटाने के वास्ते डिजाइन किया गया है।
इसमें कहा गया है कि ‘अग्रय’ अर्नाला श्रेणी का पनडुब्बी-रोधी युद्धक जहाज है, जो हल्के टॉरपीडो, स्वदेशी रॉकेट लॉन्चर और उथले पानी में काम करने वाली सोनार प्रणाली से लैस है, ताकि तटीय इलाकों में पानी के नीचे मौजूद खतरों का पता लगाकर उनसे निपटा जा सके।
बयान में कहा गया है कि इन जहाजों के 75 फीसदी से ज्यादा कलपुर्जे और प्रौद्योगिकियां स्वदेशी रूप से विकसित की गई हैं। इसमें कहा गया है कि तीनों जहाज के निर्माण में भारतीय उद्योग की बड़ी भागीदारी रही है, जिसमें 200 से ज्यादा सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) शामिल हैं।
भाषा पारुल पवनेश
पवनेश

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