Chhattisgarh High Court Divorce Judgment: ‘पति का आरोप भरोसे के लायक नहीं’…. HC ने पलट दिया फैमिली कोर्ट का फैसला, तलाक का आदेश किया रद्द

Chhattisgarh High Court Divorce Judgment: 'पति का आरोप भरोसे के लायक नहीं'.... HC ने पलट दिया फैमिली कोर्ट का फैसला, तलाक का आदेश किया रद्द

Chhattisgarh High Court Divorce Judgment: ‘पति का आरोप भरोसे के लायक नहीं’…. HC ने पलट दिया फैमिली कोर्ट का फैसला, तलाक का आदेश किया रद्द

Chhattisgarh High Court Divorce Judgment: 'पति का आरोप भरोसे के लायक नहीं'.... HC ने पलट दिया फैमिली कोर्ट का फैसला, तलाक का आदेश किया रद्द /image: IBC24 File

Modified Date: August 7, 2026 / 04:14 pm IST
Published Date: August 7, 2026 3:44 pm IST
HIGHLIGHTS
  • हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट द्वारा दी गई तलाक की डिक्री रद्द कर दी
  • कोर्ट ने कहा कि सामान्य वैवाहिक मतभेद मानसिक क्रूरता का आधार नहीं बन सकते
  • डिवीजन बेंच ने पति के आरोपों को पर्याप्त और भरोसेमंद नहीं माना

बिलासपुर। Chhattisgarh High Court Divorce Judgment: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने तलाक के एक मामले में फैमिली कोर्ट द्वारा पति के पक्ष में दी गई तलाक की डिक्री को निरस्त कर दिया है। पति का दावा था कि पत्नी उसे सांवले रंग और प्राइवेट नौकरी को लेकर ताने दिया करती थी। फैमिली कोर्ट ने इसे क्रूरता मानते हुए तलाक मंजूर की थी। जिसे पत्नी ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी।

फैमिली कोर्ट ने दी थी तलाक की डिक्री (Divorce Case)

मामले में जस्टिस प्रार्थ प्रतीम साहू और जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की डिवीजन बेंच ने कहा कि पत्नी लगातार वैवाहिक संबंध बनाए रखने का प्रयास करती रही, जबकि पति ने साथ रहने की दिशा में प्रयास नहीं किए। बिलासपुर निवासी व्यक्ति की शादी दुर्ग की महिला से हुई थी। आपसी विवाद के बाद पति ने फैमिली कोर्ट में तलाक का केस लगाया, जिसमें पति ने अपनी पत्नी पर उसके सांवले रंग और प्राइवेट नौकरी को लेकर ताने देने का आरोप लगाया था। फैमिली कोर्ट ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद तलाक की डिक्री दी थी।

पत्नी ने HC में दी थी चुनौती (Bilaspur High Court)

Chhattisgarh High Court Divorce Judgment फैमिली कोर्ट के आदेश को पत्नी ने हाईकोर्ट में यह कहते हुए चुनौती दी, कि उसने कभी वैवाहिक दायित्व निभाने से इनकार नहीं किया। वह सरकारी नौकरी में होने के कारण पदस्थापना वाली जगह पर रहने को मजबूर थी। पति और उसके परिवार ने दहेज की मांग करते हुए उसे प्रताड़ित किया। कोर्ट ने दांपत्य संबंधों की पुनर्स्थापना के आदेश दिए।

पति का आरोप भरोसे के लायक नहीं: HC (Family Court Judgment)

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि पति का यह आरोप भरोसे के लायक नहीं है कि पत्नी उसके सांवले रंग या निजी नौकरी के कारण उसे पसंद नहीं करती थी। दोनों पहले से एक-दूसरे को जानते थे और यदि ऐसा होता तो विवाह ही नहीं होता। सामाजिक बैठक में दोनों को एक-दूसरे के साथ रहने का अवसर देने की कोशिश की गई थी।

हाईकोर्ट ने कहा कि मानसिक क्रूरता का आधार केवल छोटे-मोटे वैवाहिक मतभेद या सामान्य नोकझोंक नहीं हो सकते। सुप्रीम कोर्ट के समर घोष विरुद्ध जया घोष फैसले का हवाला देते हुए कहा कि तलाक के लिए ऐसी परिस्थितियां होना आवश्यक है, जिनसे साथ रहना असंभव हो जाए। इस मामले में ऐसे कोई ठोस तत्व सामने नहीं आए हैं।

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लेखक के बारे में

सवाल आपका है... 9 सालों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. पिछले 7 सालों से डिजिटल मीडिया से जुड़े हुए हैं और कई मीडिया संस्थानों में अपना योगदान दिया है. इन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में मास्टर की डिग्री ली है.