केवल भीड़ का हिस्सा होने के कारण पुलिस राहगीरों को नहीं उठा सकती: अदालत

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केवल भीड़ का हिस्सा होने के कारण पुलिस राहगीरों को नहीं उठा सकती: अदालत

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  • Publish Date - February 6, 2026 / 03:55 PM IST,
    Updated On - February 6, 2026 / 03:55 PM IST

नयी दिल्ली, छह फरवरी (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि तुर्कमान गेट इलाके में स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास पिछले महीने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के दौरान हुई पथराव की घटना में केवल भीड़ का हिस्सा होने के आधार पर पुलिस राहगीरों को नहीं “पकड़” सकती।

न्यायमूर्ति प्रतीक जालान ने यह मौखिक टिप्पणी उस व्यक्ति की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान की जिस पर भीड़ को उकसाने का आरोप है।

अदालत ने साजिद इकबाल की अग्रिम जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस से स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा और निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता की कथित भूमिका से संबंधित वीडियो साक्ष्य भी रिकॉर्ड पर लाए जाएं।

दिल्ली पुलिस की ओर से पेश वकील ने कहा कि एजेंसी मामले में “साजिश” की जांच कर रही है और आरोप है कि याचिकाकर्ता ने बैरिकेड हटाकर भीड़ को उकसाया।

न्यायमूर्ति जालान को घटना का एक वीडियो दिखाया गया, जिसके बाद उन्होंने पुलिस से कहा कि वीडियो को उचित समय-चिह्न (टाइम स्टैम्प) के साथ रिकॉर्ड पर लाया जाए।

उन्होंने कहा कि यदि याचिकाकर्ता भीड़ का हिस्सा भी था, तो भी अशांति में उसकी विशिष्ट भूमिका पर विचार किया जाना आवश्यक है।

अदालत ने मौखिक टिप्पणी में कहा, “यदि वीडियो सामग्री से यह साबित होता है कि वह उकसा रहा है, तो आप सही हैं। यदि वह केवल वहां से गुजर रहा है, तो आप सही नहीं हैं। यदि आप उस इलाके में मौजूद हर व्यक्ति को उठा रहे हैं, तो इसकी अनुमति नहीं दी जा सकती।”

अदालत ने मामले की आगे की सुनवाई अगले सप्ताह के लिए सूचीबद्ध कर दी।

याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि वह पथराव करने वाली भीड़ का हिस्सा नहीं था। उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता अपने रिश्तेदार के घर से लौट रहा था, तभी उसे धक्का देकर भीड़ में धकेल दिया गया।

निचली अदालत ने 21 जनवरी को याचिकाकर्ता की अग्रिम जमानत याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि जांच प्रारंभिक चरण में है।

अदालत ने यह भी कहा था कि एक वीडियो में वह भीड़ को इकट्ठा करता हुआ प्रतीत होता है और वहां मौजूद रहने तथा बैरिकेड हटाने का उसके पास कोई कारण नहीं था।

यह मामला छह और सात जनवरी की मध्यरात्रि को रामलीला मैदान क्षेत्र में मस्जिद के पास अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान हुई हिंसा से जुड़ा है।

पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया पर यह अफवाह फैलाई गई थी कि तुर्कमान गेट के सामने स्थित मस्जिद को गिराया जा रहा है, जिसके बाद लोग वहां एकत्र हो गए थे।

उन्होंने बताया कि करीब 150-200 लोगों ने पुलिस और नगर निगम के कर्मियों पर पत्थर और कांच की बोतलें फेंकी, जिससे इलाके के थाना प्रभारी सहित छह पुलिसकर्मी घायल हो गए।

भाषा

राखी नरेश

नरेश