गुजरात में पुलिस, अधिकारियों ने भाजपा को पंचायत निकायों में सत्ता पर काबिज होने में मदद की: कांग्रेस
गुजरात में पुलिस, अधिकारियों ने भाजपा को पंचायत निकायों में सत्ता पर काबिज होने में मदद की: कांग्रेस
अहमदाबाद, 25 मई (भाषा) कांग्रेस ने सोमवार को आरोप लगाया कि गुजरात पुलिस, प्रशासनिक अधिकारियों और सरकारी वकीलों ने स्थानीय निकाय चुनाव के बाद विभिन्न पंचायत निकायों में भाजपा को सत्ता दिलाने में मदद की। हालांकि, सत्तारूढ़ दल ने इन आरोपों को निराधार और बेबुनियाद बताते हुए खारिज कर दिया।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमित चावड़ा ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार पर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को कमजोर करने और पंचायत निकायों पर नियंत्रण हासिल करने के लिए सरकारी तंत्र के दुरुपयोग का आरोप लगाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले महीने हुए स्थानीय निकाय चुनाव के दौरान पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी ऐसे व्यवहार कर रहे थे मानो वे सत्तारूढ़ दल की ओर से चुनाव लड़ रहे हों।
चावड़ा ने आरोप लगाया, ‘‘प्रशासन की कथित एकतरफा भूमिका जिला और तालुका पंचायतों में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पदों के लिए राज्यभर में वर्तमान में जारी चुनाव के दौरान भी जारी है।’’
तापी जिले की व्यारा तालुका पंचायत का उदाहरण देते हुए चावडा ने कहा कि कांग्रेस के पास 20 में से 13 सीट के साथ स्पष्ट बहुमत था, लेकिन 23 मई को मतदान करने जा रहे उसके सदस्यों को ले जा रहे वाहनों को पुलिस ने कथित तौर पर रोक लिया।
उन्होंने कहा कि 11 वाहनों को रोका गया और जांच के नाम पर कांग्रेस के एक सदस्य को कई घंटे तक पुलिस थाने में बैठाए रखा गया, ताकि उन्हें लोकतांत्रिक प्रक्रिया में भाग लेने से रोका जा सके।
चावड़ा ने आरोप लगाया, ‘‘पुलिस कार्रवाई के बावजूद हमारे कुछ निर्वाचित सदस्य समय पर पहुंचने में सफल रहे, लेकिन पार्टी नेताओं के प्रयासों के बावजूद तीन सदस्य समय पर नहीं पहुंच सके।’’
उन्होंने कहा कि बनासकांठा जिले की दियोदर तालुका पंचायत में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव के लिए बुलाई गई बैठक में निर्वाचन अधिकारी देर से पहुंचे और कानून-व्यवस्था की स्थिति का हवाला देते हुए बैठक को अचानक 27 मई तक स्थगित कर दिया।
चावड़ा ने आरोप लगाया कि बाद की तारीख जानबूझकर इसलिए चुनी गई, क्योंकि कांग्रेस की एक गर्भवती सदस्य का उस दिन चिकित्सकीय उपचार निर्धारित था, जिससे विपक्ष का वोट कम हो गया।
उन्होंने कहा कि आणंद जिला पंचायत में अध्यक्ष पद अनुसूचित जनजाति वर्ग की महिला के लिए आरक्षित है और भाजपा उम्मीदवार का नामांकन रविवार को निर्वाचन अधिकारी ने इसलिए रद्द कर दिया था, क्योंकि महाराष्ट्र से जारी उसका अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र गुजरात में मान्य नहीं था।
उन्होंने कहा कि उस फैसले के बाद कांग्रेस की एक अनुसूचित जनजाति महिला सदस्य मैदान में बची थीं और उनकी पार्टी के अल्पमत में होने के बावजूद उनके अध्यक्ष बनने की संभावना थी।
उन्होंने कहा कि भाजपा ने गुजरात उच्च न्यायालय का रुख किया और निर्वाचन अधिकारी के फैसले पर स्थगन की मांग की। सोमवार को उच्च न्यायालय ने उस फैसले पर रोक लगाते हुए अधिकारियों को चुनाव प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया।
चावड़ा ने आरोप लगाया, ‘‘सरकारी वकील ने भाजपा उम्मीदवार को अनुकूल आदेश दिलाने में सक्रिय तौर पर मिलीभगत की।’’
उन्होंने पुलिस अधिकारियों, प्रशासनिक अधिकारियों और सरकारी वकीलों के खिलाफ जांच की मांग की और आरोप लगाया कि उन्होंने सत्तारूढ़ दल की मदद के लिए अपने अधिकारों का ‘‘दुरुपयोग’’ किया।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस न्याय पाने और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए अदालतों का रुख करेगी।
गुजरात भाजपा के प्रवक्ता अनिल पटेल ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कांग्रेस अपनी संगठनात्मक कमजोरियों को छिपाने के लिए सत्तारूढ़ दल पर बेबुनियाद आरोप लगा रही है।
आणंद जिला पंचायत के मुद्दे पर पटेल ने कहा कि उच्च न्यायालय ने अनुसूचित जनजाति श्रेणी के तहत भाजपा उम्मीदवार के नामांकन को कानूनी रूप से वैध ठहराया है।
उन्होंने कहा, ‘‘उच्च न्यायालय ने उम्मीदवार के नामांकन को कानूनी मान्यता दी, इसलिए वह निर्वाचित हुईं। यदि कांग्रेस पार्टी को इसपर आपत्ति थी, तो उनका मुद्दा न्यायपालिका से है और उन्हें वहीं चुनौती देनी चाहिए थी, न कि सत्तारूढ़ दल को दोष देना चाहिए था।’’
उन्होंने कहा कि कांग्रेस के पास जिले में बहुमत भी नहीं था और उसके जीतने का ‘‘ख्याली पुलाव’’ पकाने का कोई कारण नहीं था।
व्यारा तालुका पंचायत से जुड़े आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए पटेल ने कहा कि कांग्रेस सदस्य स्वयं समय पर बैठक में नहीं पहुंच सके।
दियोदर तालुका पंचायत विवाद पर पटेल ने कहा कि चुनाव रद्द नहीं किया गया था, बल्कि असाधारण परिस्थितियों के कारण केवल स्थगित किया गया था।
उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस का राजनीतिक उद्देश्यों के लिए विधायी कार्यवाही बाधित करने का इतिहास रहा है, इसलिए स्थगन के फैसले पर सवाल उठाने का उसे नैतिक अधिकार नहीं है।
उन्होंने कांग्रेस नेताओं से कहा कि वे प्रशासन और भाजपा को अपनी विफलताओं के लिए दोष देने के बजाय पहले अपनी चीजों की दुरुस्त करें।
भाषा अमित सुरेश
सुरेश

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