नयी दिल्ली, 26 फरवरी (भाषा) जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू) के कई सदस्यों को बृहस्पतिवार दोपहर शिक्षा मंत्रालय की ओर एक विरोध मार्च निकालने की कोशिश करने के बाद हिरासत में ले लिया गया। यह जानकारी सूत्रों दी।
सूत्रों ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि जेएनयूएसयू अध्यक्ष अदिति मिश्रा, पूर्व जेएनयूएसयू अध्यक्ष नीतीश कुमार और कई अन्य प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया है।
हालांकि, दिल्ली पुलिस ने हिरासत को लेकर तत्काल कोई पुष्टि नहीं की।
प्रदर्शनकारी छात्र बृहस्पतिवार दोपहर को परिसर में स्थित साबरमती टी प्वाइंट पर एकत्रित हुए और तख्तियां एवं बैनर लेकर समूहों में आगे बढ़ने लगे, जब उन्होंने रैली को परिसर से बाहर ले जाने का प्रयास किया, तो विश्वविद्यालय के गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें रोक दिया।
आयोजकों ने कहा कि मार्च का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में कथित ‘‘संस्थागत उपेक्षा’’ को उजागर करना था।
सोमवार को जेएनयूएसयू के विरोध प्रदर्शन के हिंसक होने के बाद जारी तनाव के मद्देनजर विश्वविद्यालय के अंदर और बाहर सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान जेएनयूएसयू और एबीवीपी के बीच पथराव और हाथापाई की घटनाएं हुईं।
दिल्ली पुलिस ने इस घटना के संबंध में जेएनयूएसयू के पदाधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज की है।
जेएनयूएसयू विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नियमों के कड़े अनुपालन की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहा है। उन्होंने इसके अलावा “रोहित वेमुला अधिनियम” बनाने, सार्वजनिक संस्थानों के लिए वित्त पोषण बढ़ाने और 16 फरवरी को एक पॉडकास्ट में कथित जाति टिप्पणी करने के कारण जेएनयू कुलपति के इस्तीफे की भी मांग की है।
रोहित वेमुला अधिनियम एक प्रस्तावित कानून है, जिसका उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में जाति आधारित भेदभाव को समाप्त करना है।
राजद के राज्यसभा सदस्य मनोज झा ने जेएनयू में घटनाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए ‘एक्स’ पर कहा कि विश्वविद्यालय के अंदर और आसपास अचानक सुरक्षा तैनाती की खबरों ने छात्रों और संकाय सदस्यों में स्वाभाविक रूप से चिंता पैदा कर दी है।
उन्होंने कहा, ‘मैंने पहले भी कहा है और दोहराता हूं कि विश्वविद्यालय विचारों के केंद्र हैं, अनिश्चितता के नहीं, और स्पष्ट संवाद के बिना ऐसा कोई भी कदम शैक्षणिक वातावरण को अस्थिर करता है। इस समय, अधिकारियों का दायित्व है कि वे परिसर समुदाय को स्पष्टता और संवाद प्रदान करें। एक आत्मविश्वासपूर्ण लोकतंत्र अपने विश्वविद्यालयों का संचालन विश्वास के माध्यम से करता है, अपारदर्शिता से नहीं। जय हिंद।’’
सोशल मीडिया पर साझा किए गए दृश्यों के अनुसार, भारी सुरक्षा तैनाती के बीच विश्वविद्यालय के गेट को मजबूती से बैरिकेड लगाकर बंद किया गया था, जबकि प्रदर्शनकारी मार्च को परिसर के बाहर ले जाने की कोशिश कर रहे थे।
भाषा अमित रंजन
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