चंडीगढ़, आठ जून (भाषा) लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सोमवार को इस बात पर जोर दिया कि ‘विकसित भारत’ बनाने के लिए नीतियों, योजनाओं, कार्यक्रमों और बजट प्रावधानों में हमारा दृष्टिकोण समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन में बदलाव लाने पर केंद्रित होना चाहिए।
विधानसभाओं में सार्थक और सकारात्मक चर्चा पर जोर देते हुए, बिरला ने कहा कि विकसित राष्ट्र बनाने के संकल्प को साकार करने की दिशा में समाज के प्रत्येक वर्ग का योगदान होना चाहिए।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, ‘‘जब समाज के हर वर्ग का योगदान होगा, तभी भारत की शक्ति, युवाओं की ताकत इतनी अधिक होगी कि हम 2047 से पहले विकसित भारत के संकल्प को साकार कर सकेंगे।’’
इससे पहले, बिरला ने यहां द्वितीय राष्ट्रमंडल संसदीय संघ (सीपीए) भारत क्षेत्र, जोन-दो सम्मेलन का उद्घाटन किया।
चंडीगढ़ में आयोजित इस तीन-दिवसीय सम्मेलन की मेजबानी हरियाणा विधानसभा कर रही है।
सम्मेलन में सीपीए भारत क्षेत्र जोन-दो के पांच राज्यों –जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और दिल्ली– की विधानसभाओं के अध्यक्ष, विधायक, विधानपरिषदों के सभापति, उप सभापति और विधानपरिषद सदस्य भाग ले रहे हैं।
प्रतिभागी ‘‘भविष्य की चुनौतियों और विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को साकार करने में जागरूक समाज और जनप्रतिनिधियों की भूमिका’’ विषय पर विचार-विमर्श करेंगे।
अपने संबोधन में बिरला ने कहा कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था सहमति और असहमति, दोनों को समायोजित करती है तथा राज्य और राष्ट्र के विकास को आगे बढ़ाते हुए विविध विचारों और दृष्टिकोणों पर विचार करना हमारा कर्तव्य है।
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, ‘‘जब दुनिया में तेजी से परिवर्तन हो रहे हैं और कुछ तनाव भी व्याप्त है, ऐसे समय में भारत, जो कानून के शासन के साथ स्थिर और मजबूत है, दीर्घकालिक योजनाओं और नीतियों के साथ आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘हमने भारत की भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप समय-समय पर बदलाव किए हैं। आज दुनिया भारत की ओर देख रही है। यह अपार संभावनाओं वाला देश है। इस समय सामूहिक प्रयासों की बहुत आवश्यकता है।’’
बिरला ने कहा, ‘‘इसलिए, विधानसभाओं के भीतर, जब हम जनता की अपेक्षाओं और आकांक्षाओं को सामने रखते हैं और राज्य और देश के विकास पर सामूहिक रूप से चर्चा करते हैं, तो हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि ‘विकसित भारत’ के संकल्प के लिए, हमारी नीतियों, योजनाओं, कार्यक्रमों, बजट प्रावधानों और बजट समीक्षाओं में हमारा दृष्टिकोण समाज के अंतिम व्यक्ति के जीवन में बदलाव लाने पर केंद्रित हो।’’
लोकसभा अध्यक्ष ने कहा, ‘‘हमें सामाजिक परिवर्तन लाना होगा, नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देना होगा।’’ उन्होंने कहा कि आपसी सहयोग के जरिये सभी की भावनाओं को व्यक्त करने की जिम्मेदारी भी विधायकों पर है। उन्होंने विधायकों से कहा कि समाज में बदलाव लाने की ‘‘हमारी जिम्मेदारी कहीं अधिक है।’’
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष हरविंदर कल्याण तथा राज्य के संसदीय कार्य मंत्री महिपाल ढांडा ने भी सम्मेलन को संबोधित किया।
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