नयी दिल्ली, दो फरवरी (भाषा) सरकारी स्कूलों की स्थिति पर चिंता जताते हुए राज्यसभा में सोमवार को आम आदमी पार्टी के राजिन्दर गुप्ता ने कहा कि नीति निर्माता खुद सरकारी स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ने नहीं भेजते।
उच्च सदन में शून्यकाल के दौरान यह मुद्दा उठाते हुए आप सदस्य ने कहा कि शिक्षा एक महत्वपूर्ण विषय है लेकिन देश में आज भी बड़ी संख्या में बच्चे स्कूल नहीं जाते, जो जाते हैं उनमें से कई आधे बीच में पढ़ाई छोड़ देते हैं और स्कूलों में शिक्षकों की संख्या में छात्रों की तुलना में बेहद कम है।
उन्होंने कहा कि 54 फीसदी स्कूल में केवल ‘‘आधारभूत तैयारी वाली शिक्षा’’ दी जाती है और 70 फीसदी में माध्यमिक शिक्षा दी जाती है। उन्होंने कहा, ‘‘स्थिति यह है कि नीति निर्माता खुद सरकारी स्कूलों में अपने बच्चों को पढ़ने नहीं भेजते। ’’
गुप्ता ने कहा कि निजी स्कूल हर साल फीस बढ़ा देते हैं तथा पढ़ाई एव प्रतिस्पर्धा के दबाव के कारण ही आज कोचिंग केंद्रों का 58 हजार करोड़ का बाजार है।
उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण में शिक्षा के बजट में बढ़ोत्तरी की है लेकिन समर्पित शिक्षा के लिए यह आवंटन पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने मांग की कि सरकारी स्कूलों को प्रोत्साहन और समुचित सुविधाएं दी जानी चाहिए तब ही निजी स्कूलों की मनमानी पर लगाम लग सकेगी। उन्होंने कहा ‘‘शिक्षा हर बच्चे का अधिकार है और इसके लिए पुरजोर प्रयास करने होंगे।’’
भाषा
मनीषा माधव
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