नयी दिल्ली, दस जून (भाषा) उर्दू के लोकप्रिय उपन्यासकार मोहसिन खान का पहला और बहुप्रशंसित उपन्यास ‘अल्लाह मियां का कारखाना’ अब अंग्रेजी अनुवाद के साथ जल्द ही पाठकों को उपलब्ध होने जा रहा है। उर्दू से इसका अंग्रेजी में अनुवाद जाने माने अनुवादक और शायर माज बिन बिलाल ने किया है।
उपन्यास के प्रकाशक हार्पर कॉलिन्स इंडिया की ओर से बुधवार को यह जानकारी दी गई।
यह उपन्यास ‘अल्लाह मियां का कारखाना’ जिबरान नामक बच्चे के बचपन की कहानी और उसकी नजरों से दुनिया का अंदाज ए बयां है। कहानी जिबरान की मासूम शरारतों पर हंसाती है तो समाज और व्यवस्था की क्रूरता पर सोचने को मजबूर करती है। इसका अग्रेजी संस्करण 23 जून से पाठकों के लिये उपलब्ध होगा।
अवध के एक गांव पर केंद्रित उपन्यास 14 साल के जिबरान के इर्द गिर्द घूमता है जो बेहद उत्साही, उत्सुक और शरारती होने के साथ ही विचारणीय प्रश्न करता है। उसके रूढ़िवादी अब्बू चाहते हैं कि जिबरान मस्जिद में काम करे। पतंगों, अपनी दो मुर्गियों और स्कूल के मौलवी के आसपास घूमता उसका बेलौस बचपन और उसके मासूम सपने उस समय टूट कर बिखर जाते हैं जब उसके पिता को आतंकवाद के संदेह में गिरफ्तार कर लिया जाता है।
पिता की गैरमौजूदगी, अलगाव और अनिश्चितता से जूझता जिबरान अपने बाल मन को समझाने के लिए कल्पनाओं की दुनिया में जाकर आसरा ढूंढता है।
अनुवादक के अनुसार, यह किताब मूल रूप से उर्दू में छपी थी और यह एक भारतीय-मुस्लिम बच्चे की कहानी है, जिसकी अपनी खुशियां और परेशानियां हैं।
मिर्जा ग़ालिब की ‘चिराग-ए-दैर’ का अंग्रेजी में ‘टेंपल लैंप’ शीर्षक से अनुवाद करने वाले बिलाल ने कहा, ‘‘यह कहानी भावनात्मक रूप से आपको हिला देने वाली है और इसके नायक जिबरान की मासूमियत ने मुझे बांध लिया।’’
उनका कहना था, ‘‘हमारे समय का सामाजिक और राजनीतिक विमर्श भी उपन्यास के लिए ठोस जमीन तैयार करता है जिससे हम में से अधिकतर के लिए बच पाना मुश्किल है।’’
उपन्यास की कमीशनिंग एडिटर (साहित्य) रीनीता बनर्जी के अनुसार, ‘‘यह किताब एक ऐसी कहानी को लेकर चलती है जिसमें ‘प्यार, डर, आक्रोश और अद्भुत बयानी है और ये सब बिलाल के अंग्रेजी अनुवाद में जीवंत हो उठी है।’’
उनका कहना था, ‘‘जिबरान की पतंगों की तरह यह उपन्यास संजोकर रखने लायक है। ‘अल्लाह मियां का कारखाना’ अनुवाद की दुनिया में उर्दू साहित्य का सबसे शानदार काम है जिसे हमें हार्पर कॉलिन्स के जरिए पाठकों के सामने लाकर बहुत खुशी हो रही है। इसे पढ़िए जरूर।’’
‘अल्लाह मियां का कारखाना’ के हिंदी अनुवाद ने 2023 में पहला बैंक ऑफ़ बड़ौदा पुरस्कार जीता है।
भाषा नरेश नरेश रंजन
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