नयी दिल्ली, 23 जनवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने पुणे में मई 2024 में हुई पोर्श कार दुर्घटना मामले में एक आरोपी की जमानत याचिकाओं पर महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा है।
इस दुर्घटना में दो लोगों की जान चली गई थी।
पुणे के कल्याणी नगर इलाके में 19 मई 2024 को 17-वर्षीय एक किशोर द्वारा कथित तौर पर शराब के नशे में चलाई जा रही पोर्श कार ने दो आईटी पेशेवरों को टक्कर मार दी थी, जिससे उनकी मौत हो गई थी।
न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां की पीठ ने राज्य सरकार को नोटिस जारी किया और मुंबई उच्च न्यायालय के 16 दिसंबर के आदेश के खिलाफ आरोपी अमर संतिश गायकवाड़ द्वारा दायर याचिका को इस मामले से संबंधित अन्य समान मामलों के साथ संलग्न कर दिया।
गायकवाड़ की ओर से पेश अधिवक्ता सना रईस खान ने कहा कि उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में गलती की और उसे जमानत देने से इनकार कर दिया।
खान ने बृहस्पतिवार को पीठ के समक्ष प्रस्तुत किया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ एकमात्र आरोप यह था कि उसने मौद्रिक लेनदेन में मध्यस्थ की भूमिका निभाई, जो चिकित्सा साक्ष्य में छेड़छाड़ करने या ससून अस्पताल में किशोर के रक्त के नमूने की अदला-बदली के लिए किया गया था।
उच्चतम न्यायालय ने सात जनवरी को इस मामले में जमानत का आग्रह करते हुए दो अन्य आरोपियों द्वारा दायर याचिकाओं पर महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा था।
आदित्य अविनाश सूद (52) और आशीष सतीश मित्तल (37) को पिछले साल 19 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था, क्योंकि दुर्घटना के समय 17-वर्षीय मुख्य आरोपी के साथ कार में मौजूद दो नाबालिगों से जुड़े मामले की जांच में उनके (सूद और मित्तल के) रक्त नमूनों का परीक्षण किया गया था।
उच्च न्यायालय ने पिछले साल 16 दिसंबर को इस मामले में सूद और मित्तल समेत आठ आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं।
किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) ने नाबालिग आरोपी को उदार शर्तों पर जमानत दे दी थी, जिससे व्यापक स्तर पर रोष जताया गया था। जमानत की शर्तों में सड़क सुरक्षा पर 300 शब्दों में निबंध लिखना शामिल था।
नाबालिग को जमानत दिए जाने से मचे बवाल के बाद पुणे पुलिस ने जेजेबी से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया। इसके बाद, बोर्ड ने आदेश में संशोधन किया और नाबालिग को सुधार गृह भेज दिया। जून में उच्च न्यायालय ने नाबालिग को रिहा करने का आदेश दिया था।
भाषा
देवेंद्र माधव
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