सभी सदस्यो को मिलेगा पर्याप्त समय: राथर; बजट सत्र के सुचारू संचालन का सहयोग मांगा

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सभी सदस्यो को मिलेगा पर्याप्त समय: राथर; बजट सत्र के सुचारू संचालन का सहयोग मांगा

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  • Publish Date - February 2, 2026 / 05:36 PM IST,
    Updated On - February 2, 2026 / 05:36 PM IST

जम्मू, दो फरवरी (भाषा) जम्मू-कश्मीर विधानसभा के अध्यक्ष अब्दुल रहीम राथर ने बजट सत्र की सफलता के लिए सोमवार को सदस्यों के सहयोग की अपेक्षा की। उन्होंने यह भी कहा कि लोकतंत्र में मतभेद की गुंजाइश होती है, लेकिन सभी सदस्यों को एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए और अनावश्यक टकराव से बचना चाहिए।

राथर ने सदस्यों को आश्वस्त किया कि 27 दिनों तक चलने वाले बजट सत्र के दौरान उन्हें पर्याप्त समय दिया जाएगा, जिसके पहले चरण में 19 फरवरी तक प्रतिदिन पूर्वार्द्ध में दो बैठकें होंगी।

उन्होंने सदस्यों से आग्रह किया कि वे इस सत्र का उपयोग अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों से संबंधित सार्वजनिक मुद्दे उठाने और उनके समाधान की मांग के लिए करें।

अध्यक्ष ने सदन में उपराज्यपाल का अभिभाषण प्रस्तुत करने के तुरंत बाद कहा, ‘‘यह सदन उन लोगों की आशाओं, आकांक्षाओं और विश्वास का प्रतिनिधित्व करता है, जिन्होंने हमें चुनकर यहां भेजा है। उनलोगों की सेवा करना न केवल एक विशेषाधिकार है, बल्कि एक व्यापक जिम्मेदारी भी है।’’

राथर ने सत्र को अत्यंत मूल्यवान बताते हुए कहा कि लोकतंत्र में मतभेदों के लिए निस्संदेह गुंजाइश है।

उन्होंने कहा, ‘‘हालांकि, इन मतभेदों को गरिमापूर्ण तरीके से व्यक्त किया जाना चाहिए। हमें एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए और अनावश्यक टकरावों में उलझने से बचना चाहिए। हमें याद रखना चाहिए कि हम यहां जो कुछ भी कर रहे हैं, उसपर बाहर के लोगों की नजर है,… हमें बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। यहां तक ​​कि एक छोटी सी गलती भी उन लोगों की नजर में आ जाएगी, जिन्होंने हमें यहां भेजा है।’’

उन्होंने कहा कि सत्र का पहला भाग 19 फरवरी को समाप्त हो रहा है, इसलिए बजट से संबंधित अधिकतम कार्य तब तक पूरा हो जाना चाहिए।

राथर ने कहा कि नियमों के अनुसार बजट सत्र में दो-दो बैठकें होंगी और सदन में शाम पांच बजे तक कार्यवाही हो सकती है।

सदन में सदस्यों को बोलने का पर्याप्त अवसर देने का आश्वासन देते हुए उन्होंने कहा कि हालांकि सभी को पूरी तरह से समायोजित करना संभव नहीं हो सकता है, लेकिन यथासंभव अधिक से अधिक सदस्यों को समायोजित करने का प्रयास किया जाएगा, क्योंकि यह एकमात्र अवसर है जब आप अपने निर्वाचन क्षेत्रों के मुद्दों को सरकार के समक्ष प्रस्तुत करते हैं और उनका समाधान मांगते हैं।

उन्होंने कहा, “आपको पर्याप्त अवसर दिया जाएगा; आप इस समय का सदुपयोग कैसे करते हैं, यह आप पर निर्भर है, लेकिन मैं एक बात स्पष्ट रूप से कहना चाहता हूं: लोग अपनी समस्याओं का समाधान चाहते हैं; वे व्यवधान नहीं चाहते। किसी भी रूप में व्यवधान अस्वीकार्य है। दुर्भाग्यवश, कभी-कभी व्यवधान और रुकावटें उत्पन्न हो जाती हैं, और लोग इससे नाखुश होते हैं।”

खुद के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि वह 1977 से लगातार विधायक रहे हैं और शोर-शराबा एवं अव्यवस्था उनके मतदाताओं को संतुष्ट नहीं कर सकती।

उन्होंने कहा, “आप शिष्ट भाषा, शालीनता और नैतिकता के माध्यम से अपनी बात प्रभावी ढंग से रख सकते हैं। इस सत्र के आयोजन में पैसा लगता है, और वह पैसा जनता का है। हम जनता के प्रतिनिधि हैं, और यह धनराशि भी सार्वजनिक धन है। हमें इसका सम्मान करना चाहिए।”

उन्होंने कहा कि उन्हें लोगों को यह कहने का कोई अवसर नहीं देना चाहिए कि उनके प्रतिनिधि वहां केवल अव्यवस्था पैदा करने जाते हैं और उनकी समस्याओं को नहीं उठाते हैं।

अध्यक्ष ने कहा कि सदन में अनुशासन बनाए रखना उनका कर्तव्य है।

उन्होंने कहा, “मैं किसी भी परिस्थिति में व्यवस्था भंग करने के किसी भी प्रयास को बर्दाश्त नहीं करूंगा।”

हालांकि, उन्होंने कहा कि वह चाहते हैं कि ऐसी स्थिति कभी न उत्पन्न हो जहां अध्यक्ष को सख्त कार्रवाई करने के लिए विवश होना पड़े।

उन्होंने कहा, “हममें से प्रत्येक लगभग एक लाख लोगों के निर्वाचित प्रतिनिधि हैं; इसलिए हमें अनुशासन का उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। हमें लोगों को सिखाना चाहिए कि कैसे बोला जाता है और सार्वजनिक मुद्दों को कैसे उठाया जाता है।”

भाषा तान्या सुरेश

सुरेश