नयी दिल्ली, 26 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने 2024 के पुणे पोर्श कार दुर्घटना मामले में संलिप्त नाबालिग के पिता द्वारा दायर जमानत याचिका पर बृहस्पतिवार को महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा।
पुणे के कल्याणी नगर इलाके में 19 मई 2024 को कथित तौर पर शराब के नशे में गाड़ी चला रहे 17 वर्षीय एक किशोर ने पोर्श कार से दो आईटी पेशेवरों को टक्कर मार दी थी, जिससे उनकी मौत हो गई।
न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्ज्ल भुइयां की पीठ ने विशाल अग्रवाल की याचिका पर राज्य सरकार को नोटिस जारी किया।
अग्रवाल ने मुंबई उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देते हुए अपील दायर की है, जिसमें उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया गया था।
मामले की सुनवाई के लिए 10 मार्च की तारीख निर्धारित की गई। उच्च न्यायालय ने 16 दिसंबर 2025 को अग्रवाल और अन्य आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी थी।
शीर्ष अदालत ने दो फरवरी को तीन आरोपियों को जमानत देते हुए कहा था कि नाबालिगों से जुड़ी घटनाओं के लिए माता-पिता को ही जिम्मेदार ठहराया जाना चाहिए, क्योंकि उनका अपने बच्चों पर कोई वश नहीं है।
न्यायालय ने आरोपी अमर संतिश गायकवाड़ (कथित बिचौलिया), आदित्य अविनाश सूद और आशीष सतीश मित्तल (कार में सवार दो अन्य नाबालिगों के माता-पिता) के 18 महीने से हिरासत में होने पर गौर करते हुए जमानत मंजूर की थी।
शीर्ष अदालत ने 23 जनवरी को, गायकवाड़ द्वारा दायर जमानत याचिका पर महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा था।
इससे पहले, सात जनवरी को शीर्ष अदालत ने मामले में दो अन्य आरोपियों द्वारा दायर जमानत याचिकाओं पर महाराष्ट्र सरकार से जवाब मांगा था।
सूद (52) और मित्तल (37) को पिछले साल 19 अगस्त को गिरफ्तार किया गया था, क्योंकि दुर्घटना के समय 17 वर्षीय मुख्य आरोपी के साथ कार में मौजूद दो नाबालिगों के रक्त की जांच के लिए उनके नमूनों का इस्तेमाल किया गया था।
उच्च न्यायालय ने पिछले साल 16 दिसंबर को गायकवाड़, सूद और मित्तल समेत आठ आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी थीं।
इससे पहले, किशोर न्याय बोर्ड (जेजेबी) द्वारा नाबालिग आरोपियों को नरम शर्तों पर जमानत दिए जाने पर व्यापक स्तर पर आक्रोश देखने को मिला था। इन शर्तों में से एक शर्त सड़क सुरक्षा पर 300 शब्दों में निबंध लिखना था।
इस हंगामे के बाद पुणे पुलिस ने जेजेबी से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया। इसके बाद, बोर्ड ने आदेश में संशोधन करते हुए नाबालिग को सुधार गृह भेज दिया।
जून में उच्च न्यायालय ने नाबालिग को रिहा करने का आदेश दिया।
मामले में शामिल नाबालिग को सुधार गृह से रिहा कर दिया गया, जबकि रक्त के नमूने बदलने के मामले में उसके माता-पिता विशाल अग्रवाल और शिवानी अग्रवाल, डॉक्टर अजय तावड़े और श्रीहरि हलनोर, ससून अस्पताल के कर्मचारी अतुल घाटकांबले, सूद, मित्तल और अरुण कुमार सिंह समेत 10 आरोपियों को जेल भेज दिया गया था।
भाषा सुभाष प्रशांत
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