वर्ष 2018 से पूर्व के भूमि अधिग्रहण मामले ब्याज सहित मुआवजे के लिए पुन: नहीं खोले जा सकते: न्यायालय

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वर्ष 2018 से पूर्व के भूमि अधिग्रहण मामले ब्याज सहित मुआवजे के लिए पुन: नहीं खोले जा सकते: न्यायालय

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  • Publish Date - February 23, 2026 / 02:20 PM IST,
    Updated On - February 23, 2026 / 02:20 PM IST

नयी दिल्ली, 23 फरवरी (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को मौखिक टिप्पणी की कि भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) अधिनियम के तहत जिन किसानों की जमीन अधिगृहीत की गई थी, उन्हें ब्याज सहित मुआवजा देने के लिए 2018 से पहले के भूमि अधिग्रहण मामलों को फिर से नहीं खोला जा सकता।

यह टिप्पणी भारत के प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की विशेष पीठ ने एनएचएआई की उस याचिका पर खुली अदालत में सुनवाई शुरू करते समय की जिसमें एनएचएआई ने न्यायालय के 2019 के फैसले की समीक्षा का अनुरोध किया है।

शीर्ष अदालत ने 2019 में कहा था कि एनएचएआई अधिनियम के तहत जिन किसानों की जमीन अधिगृहीत की गई, उन्हें ब्याज सहित मुआवजा देने का फैसला पूर्वव्यापी रूप से लागू होगा।

एनएचएआई की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि 2019 के फैसले से भारी वित्तीय बोझ (लगभग 32,000 करोड़ रुपये) पड़ेगा और यह केवल भावी प्रभाव से लागू होना चाहिए।

पीठ ने पहले इसे खारिज करते हुए कहा था कि ऐसे लाभ से वंचित करना संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन करता है।

मेहता ने कहा, ‘‘शायद आपके लिए सबसे महत्वपूर्ण बात यह थी कि यह 100 करोड़ रुपये की रकम थी।’’ उन्होंने कहा कि एक अन्य फैसले में शीर्ष अदालत ने कहा है कि निपटाए गए किसी भी मामले को दोबारा नहीं खोला जाएगा।

सीजेआई ने कहा, ‘‘ ‘कट-ऑफ’ (अंतिम) तिथि 2008 की प्रतीत होती है, बशर्ते दावे तब लंबित रहे हों। 2018 से पहले के मामले फिर से नहीं खोले जा सकते। जो मामले 2008 में लंबित थे, वे आगे भी जारी रहेंगे। यदि 2020 के शुरुआती वर्षों में किसी ने यह कहते हुए आवेदन दाखिल किया कि 2008 के आधार पर वह समानता का हकदार है, तो हम कह सकते हैं कि मुआवजे के मामले में ‘हां’ वह हकदार है, लेकिन ब्याज के मामले में नहीं, जैसे भूमि अधिग्रहण मामलों में होता है।’’

पीठ ने संक्षिप्त दलीलें सुनीं एवं पक्षकारों से लिखित दलीलें (यदि कोई हों) दाखिल करने को कहा तथा पुनरीक्षण याचिका को दो सप्ताह बाद सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया।

सीजेआई की अगुवाई वाली पीठ ने अपने फैसले की समीक्षा का अनुरोध करने वाली एनएचएआई की याचिका को खुली अदालत में सुनने पर पिछले वर्ष चार नवंबर को सहमति जताई थी।

सॉलिसिटर जनरल ने पीठ से कहा था कि इस मामले के व्यापक निहितार्थ होंगे, जिसमें शामिल राशि लगभग 32,000 करोड़ रुपये है, न कि 100 करोड़ रुपये, जैसा कि याचिका में पहले कहा गया था।

भाषा सिम्मी नेत्रपाल

नेत्रपाल

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