President Droupadi Murmu in Ayodhya: अयोध्या पहुंची राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, राम मंदिर में की 150 किलो के ‘श्रीराम यंत्र’ की स्थापना, जानिए क्या है इसकी खासियत

President Droupadi Murmu in Ayodhya: अयोध्या पहुंची राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, राम मंदिर में की 150 किलो के 'श्रीराम यंत्र' की स्थापना, जानिए क्या है इसकी खासियत

President Droupadi Murmu in Ayodhya: अयोध्या पहुंची राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, राम मंदिर में की 150 किलो के ‘श्रीराम यंत्र’ की स्थापना, जानिए क्या है इसकी खासियत

President Droupadi Murmu in Ayodhya | Photo Credit: ANI

Modified Date: March 19, 2026 / 01:39 pm IST
Published Date: March 19, 2026 12:41 pm IST
HIGHLIGHTS
  • राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने रामलला के दर्शन कर राम मंदिर में श्रीराम यंत्र की स्थापना की
  • राम यंत्र को ब्रह्मांडीय ऊर्जा और प्रभु श्रीराम की मर्यादा का प्रतीक माना जाता है
  • यह यंत्र कांचीपुरम मठ में निर्मित हुआ और अयोध्या तक रथयात्रा से लाया गया

नई दिल्ली: President Droupadi Murmu in Ayodhya श्रीराम जन्मभूमि मंदिर आज आस्था और इतिहास का संगम बन गया है। देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू आज उत्तर प्रदेश के अयोध्या दौरे पर है। इस दौरान आज उन्होंने रामलला के दर्शन किए। इसके बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने वैदिक मंत्रों के बीच राम मंदिर के द्वितीय तल पर श्रीराम यंत्र की पूजन के बाद स्थापना की। इस अवसर पर पूरी रामनगरी भक्ति, सुरक्षा और परंपरा के रंग में रंगी नजर आई।

President Droupadi Murmu in Ayodhya वैदिक आचार्यों ने पूजन सम्पन्न करवाया। श्रीराम यंत्र की स्थापना मंदिर के द्वितीय तल पर की गई है। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए जब वह अयोध्या पहुंचीं तो महर्षि वाल्मीकि एयरपोर्ट पर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक ने उनका स्वागत किया।

शंकराचार्य द्वार से राम मंदिर के अंदर पहुंचीं राष्ट्रपति मुर्मू

राष्ट्रपति मुर्मू ने शंकराचार्य द्वार से राम मंदिर के अंदर प्रवेश किया। वह अब से लेकर 5 घंटे अयोध्या में मौजूद रहेंगी और राम लला के और राम परिवार के दर्शन करेंगी। राष्ट्रपति के स्वागत में जगह-जगह सांस्कृतिक केंद्र बनाए गए थे। ढोल बजाकर राम मंदिर में उनका स्वागत हुआ।

जानें राम यंत्र के बारे में

आपको बता दें कि यह कोई साधारण आकृति की धातु नहीं है, बल्कि इसे ब्रह्मांडीय ऊर्जा, गणित और आध्यात्मिकता का स्वरूप माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, जिस प्रकार ‘श्री यंत्र’ को देवी लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है, उसी प्रकार ‘श्री राम यंत्र’ को भगवान विष्णु के अवतार प्रभु श्री राम की विजय और मर्यादा का प्रतीक माना जाता है। इसे विशेष धातुओं के मिश्रण और वैदिक गणनाओं के आधार पर निर्मित किया गया है।

तमिलनाडु स्थित मठ से हुआ त्यैयार

बता दें कि इस ‘राम यंत्र’ को तमिलनाडु के कांचीपुरम स्थित मठ में बनाया गया। वहां से इसे तिरुपति लाया गया। जिसके बाद रथयात्रा के जरिए 10 दिन पहले इसे अयोध्या पहुंचाया गया। राम यंत्र का वजन 150 किलो है। इस पर सोने की परत चढ़ाई गई है।

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