Priyank Kharge On RSS: ‘अहंकार छोड़कर कानून का पालन करें’, RSS पर भड़के प्रदेश के गृह मंत्री, दे दिया सबको चौंकाने वाला बयान

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Priyank Kharge On RSS: कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने RSS से ‘‘अहंकार छोड़कर’’ कानून का पालन करने को कहा है।

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  • Publish Date - June 16, 2026 / 04:12 PM IST,
    Updated On - June 16, 2026 / 04:12 PM IST

Priyank Kharge On RSS/Image Credit: X Handle

Priyank Kharge On RSS: बेंगलुरु: कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (RSS) से ‘‘अहंकार छोड़कर’’ कानून का पालन करने को कहा है। मंत्री खरगे ने साथ ही कहा कि एक तरफ तो आरएसएस दावा करता है कि उसका कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है वहीं दूसरी ओर वह समाज और राजनीति पर व्यापक प्रभाव रखता है, जो कि स्वीकार्य नहीं है। गृह मंत्री खरगे ने आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत द्वारा संघ को पंजीकृत कराने की मांगों को खारिज किए जाने के जवाब में सोमवार देर रात एक पोस्ट में यह बात कही।

मोहन भागवत का दावा चिंताजनक: गृह मंत्री खरगे

प्रियांक खरगे ने कहा कि भागवत का यह दावा सबसे अधिक चिंताजनक है कि आरएसएस किसी भी सवाल का जवाब देने के लिए बाध्य नहीं है। उन्होंने कहा ‘‘जबकि वे करदाताओं के पैसे से मिलने वाली सभी सरकारी सुविधाओं और प्रोटोकॉल का लाभ उठाते हैं ।’’ खरगे ने कहा कि यह ऐसी मानसिकता को दर्शाता है जिसमें सार्वजनिक जवाबदेही को वैकल्पिक माना जाता है और यह समझा जाता है कि संगठन कानूनी जांच-परख से ऊपर है। उन्होंने कहा, ‘‘ एक संवैधानिक लोकतंत्र में कोई भी संस्था चाहे वह कितनी ही पुरानी या प्रभावशाली क्यों न हो ऐसा विशेषाधिकार नहीं रखती। अहंकार छोड़िए, कानून का पालन कीजिए और अपने ‘पदाधिकारियों’ या ‘कानूनी प्रमुखों’ को मेरे पास भेजिए, ताकि वे मुझे इसका स्पष्टीकरण दें।’’

आरएसएस को अपना वैचारिक मार्गदर्शक मानती है भाजपा

गृह मंत्री प्रियांक खरगे ने कहा, ‘‘मैं स्थिति को स्पष्ट कर देना चाहता हूं। आरएसएस को एक सांस्कृतिक संगठन होने का पूरा अधिकार है, यह उनका निर्णय है। लेकिन यह संभव नहीं है कि वह समाज और राजनीति पर व्यापक प्रभाव भी रखे और बार-बार यह भी दावा करे कि उसका कोई राजनीतिक एजेंडा नहीं है, इसलिए वह किसी भी सार्वजनिक जवाबदेही के लिए बाध्य नहीं है। स्वयं भाजपा भी आरएसएस को अपना वैचारिक मार्गदर्शक मानती है और सार्वजनिक जीवन पर उनका प्रभाव स्पष्ट और निर्विवाद है।’’

राज्य के गृह मंत्री ने दावा किया कि आरएसएस 2500 से अधिक संबद्ध संगठनों के एक विशाल तंत्र के माध्यम से, देश और विदेश दोनों से दान प्राप्त करता है और दिल्ली तथा अन्य राज्यों की राजधानियों में स्थित विशाल मुख्यालयों से संचालित होता है। उन्होंने कहा, ‘‘आरएसएस प्रमुख को ‘एडवांस्ड सिक्योरिटी लाइजन प्रोटोकॉल’ प्राप्त है और आरएसएस के अन्य लोगों को भी करदाताओं द्वारा वित्तपोषित प्रोटोकॉल मिलते हैं, इसलिए जनता को यह जानने का अधिकार है कि क्या यह संगठन उन्हीं कानूनी मानकों का पालन करता है, जो सभी के लिए अपेक्षित हैं।’ खरगे ने कहा कि कानून के तहत औपचारिक मान्यता मिलने से इस विरोधाभास का समाधान एक बार और हमेशा के लिए हो जाएगा।

क्या है मोहन भागवत का बयान?

केरल के त्रिशूर में एक बातचीत के दौरान भागवत ने आरएसएस को पंजीकृत कराने की मांगों को खारिज कर दिया था और कहा था कि संगठन न तो गोपनीय रूप से काम करता है और न ही सार्वजनिक जांच से बाहर है। उन्होंने कहा कि संगठन के पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है और वह अपनी गतिविधियां खुले रूप से संचालित करता है। पंजीकरण की मांग को ‘राजनीति’ बताते हुए उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास संगठन के लिए कुछ नया नहीं हैं। कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियंक खरगे ने सोमवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से कहा कि वह अपना पंजीकरण कराए, अपनी कानूनी स्थिति स्पष्ट करे तथा वित्तपोषण के स्रोत, आय, खर्च और संपत्ति का खुलासा करे। उन्होंने कहा कि आरएसएस को पारदर्शिता और संवैधानिक जवाबदेही बनाए रखनी चाहिए।

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