मस्जिदों को निशाना बनाए जाने के विरोध में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, सांसदों समेत कई हिरासत में

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मस्जिदों को निशाना बनाए जाने के विरोध में जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, सांसदों समेत कई हिरासत में

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  • Publish Date - September 29, 2026 / 10:38 PM IST,
    Updated On - September 29, 2026 / 10:38 PM IST

नयी दिल्ली, 29 सितंबर (भाषा) देश के अलग-अलग राज्यों में अल्पसंख्यक समुदायों की इबादतगाहों को कथित रूप से निशाना बनाए जाने के खिलाफ मुस्लिम संगठनों, नागरिक समाज के सदस्यों और सांसदों समेत अन्य ने मंगलवार को यहां जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन के आयोजक ‘मॉनिटरिंग कमिटी ऑफ इंडियन मुस्लिम्स’ ने एक बयान में कहा कि प्रदर्शन में समाजवादी पार्टी के सांसदों, इकरा हसन, मुहिबुल्लाह नदवी व ज़िया-उर-रहमान बर्क़, पूर्व सांसद मोहम्मद अदीब और जमात-ए-इस्लामी हिंद के अध्यक्ष सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी समेत मुस्लिम संगठनों, नागरिक समाज के सदस्यों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, वकीलों और विभिन्न समुदायों के लोगों ने हिस्सा लिया।

इसमें कहा गया है कि मस्जिदों और इबादतगाहों के खिलाफ निरंतर कार्रवाई और विध्वंस के विरोध में यह प्रदर्शन किया गया।

बयान के अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने मस्जिदों, गिरजाघरों और इबादतगाहों पर हमलों को लेकर चिंता जताई और देश में संवैधानिक अधिकारों, लोकतांत्रिक संस्थाओं और सामाजिक न्याय से जुड़े व्यापक सवाल भी उठाए।

इसमें कहा गया है कि दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया, जिनमें सांसद हसन, नदवी, बर्क़ और जमात-ए-इस्लामी हिंद के उपाध्यक्ष मोतसिम खान समेत कई अन्य नेता, छात्र, कार्यकर्ता और अन्य लोग शामिल थे।

दिल्ली पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि हिरासत में लिये गए सांसदों समेत सभी प्रदर्शनकारियों को रिहा कर दिया गया है।

बयान के मुताबिक, जमात-ए-इस्लामी हिंद के अध्यक्ष सैयद सआदतुल्लाह हुसैनी ने कहा, ‘हमारा मुद्दा एक मस्जिद या किसी एक समुदाय से कहीं बड़ा है। जब किसी इबादतगाह को गिराया जाता है या कानूनी और संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा के बिना उसके खिलाफ कोई कार्रवाई की जाती है तो इससे कानून के शासन पर गंभीर सवाल उठते हैं। मस्जिदों और गिरजाघरों को लक्षित करके निशाना बनाना सांप्रदायिक भावना से प्रेरित है और यह हमारी संस्कृति और सभ्यता पर एक कलंक है।”

पूर्व सांसद मोहम्मद अदीब ने कहा कि नागरिकों को अपनी बात रखने से रोकना और समुदाय के नेताओं को हिरासत में लेना बेहद चिंताजनक है।

लोकसभा सदस्य इकरा हसन ने कहा, ‘शांतिपूर्ण विरोध को खतरे के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। नागरिकों को एकजुट होने और अपनी चिंताएं जाहिर करने का अधिकार है। अधिकारियों को लोगों को बोलने से रोकने के बजाय उनकी बात सुननी चाहिए।’

भाषा नोमान नोमान सुरेश

सुरेश