पेपर लीक मुद्दे पर पीएम आवास के पास धरना देना दुर्भाग्यपूर्ण : गहलोत

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पेपर लीक मुद्दे पर पीएम आवास के पास धरना देना दुर्भाग्यपूर्ण : गहलोत

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  • Publish Date - July 21, 2026 / 08:18 PM IST,
    Updated On - July 21, 2026 / 08:18 PM IST

(फाइल फोटो के साथ)

जयपुर, 21 जुलाई (भाषा) राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने मंगलवार को कहा कि कथित नीट प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और कई सांसदों को प्रधानमंत्री आवास के पास धरना देना पड़ा, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।

उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शन कर रहे विद्यार्थियों से संवाद करने से केंद्र सरकार का इनकार उसकी विफलता को दर्शाता है।

गहलोत ने यहां प्रेसवार्ता में कहा, ‘‘नीट प्रश्नपत्र लीक को लेकर कई दिनों से विद्यार्थी प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन सरकार ने उनसे संवाद शुरू करने की कोई कोशिश नहीं की। सरकार का कोई प्रतिनिधि प्रदर्शनकारी विद्यार्थियों से मिलने या उनकी मांग जानने तक नहीं गया।’’

उन्होंने कहा कि राहुल गांधी लगातार प्रश्नपत्र लीक का मुद्दा उठा रहे हैं और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि यह अभूतपूर्व है कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष, कांग्रेस अध्यक्ष और कई सांसदों को आज प्रधानमंत्री आवास के पास धरने पर बैठना पड़ा।

उन्होंने सवाल किया, ‘‘इससे देश और दुनिया में क्या संदेश जा रहा है?’’

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का रवैया उसके बड़े-बड़े दावों की पोल खोलता है।

गहलोत ने दावा किया कि बार-बार होने वाले परीक्षा प्रश्नपत्र लीक, बेरोजगारी और महंगाई को लेकर युवाओं में जितना आक्रोश है, सरकार उसका सही आकलन नहीं कर पा रही है।

उन्होंने कहा, ‘‘यदि सरकार का लोकतंत्र में विश्वास है तो उसे युवाओं की आवाज सुननी चाहिए और उनसे संवाद शुरू करना चाहिए।’’

सोमवार की पुलिस कार्रवाई का उल्लेख करते हुए गहलोत ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान विद्यार्थियों पर लाठीचार्ज किया गया और उन्हें तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े गए।

उन्होंने प्रदर्शन स्थल से बैरिकेड हटाये जाने पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जब आंदोलन जारी था तो बैरिकेड क्यों हटाए गए, यह अब तक स्पष्ट नहीं है।

गहलोत ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों से विद्यार्थी इस आंदोलन में इसलिए शामिल हुए क्योंकि उन्हें लगा कि उनकी समस्याओं के समाधान के लिए कोई प्रभावी व्यवस्था नहीं है।

उन्होंने दावा किया कि यह मामला अब केवल नीट प्रश्नपत्र लीक तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह बेरोजगारी, महंगाई और संवैधानिक संस्थाओं के कामकाज को लेकर जनता के व्यापक असंतोष को भी दर्शाता है।

पूर्व मुख्यमंत्री ने मुख्यधारा के मीडिया पर भी विद्यार्थियों की चिंताओं को पर्याप्त महत्व नहीं देने का आरोप लगाया और उससे स्वतंत्र एवं निष्पक्ष रिपोर्टिंग करने की अपील की।

उन्होंने कहा,‘‘जन समस्याओं से लोगों को अवगत कराने में मीडिया की महत्वपूर्ण भूमिका है। यदि वह दबाव में काम करता रहा तो इतिहास उसे माफ नहीं करेगा।’’

गहलोत ने कहा कि राहुल गांधी ने ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था की अनियमितताओं को उजागर किया ।

उन्होंने कहा कि यह आंदोलन राजनीति का नहीं, बल्कि लाखों विद्यार्थियों के भविष्य का सवाल है।

भाषा बाकोलिया राजकुमार

राजकुमार