पुणे पोर्श दुर्घटना: न्यायालय ने रक्त नमूने अदला-बदली मामले में नाबालिग के पिता को जमानत दी

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पुणे पोर्श दुर्घटना: न्यायालय ने रक्त नमूने अदला-बदली मामले में नाबालिग के पिता को जमानत दी

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  • Publish Date - March 10, 2026 / 08:55 PM IST,
    Updated On - March 10, 2026 / 08:55 PM IST

नयी दिल्ली, 10 मार्च (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने 2024 में पुणे में पोर्श कार दुर्घटना मामले में आरोपी नाबालिग के पिता को मंगलवार को जमानत दे दी। दुर्घटना में दो लोगों की मौत हो गयी थी।

घटना 19 मई, 2024 की है, जब पुणे के कल्याणी नगर इलाके में कथित तौर पर शराब के नशे में 17 वर्षीय लड़के द्वारा चलाई जा रही पोर्श कार ने दो आईटी पेशेवरों को कुचल दिया था।

न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने विशाल अग्रवाल को जमानत दे दी, जिन पर कार में सवार लोगों को ‘निल अल्कोहल’ रिपोर्ट सुनिश्चित करने के लिए नाबालिग के रक्त के नमूने बदलने की साजिश रचने का आरोप है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि मामले में सह-आरोपियों को राहत दी गई है और आरोपी पिछले 22 महीनों से जेल में है।

पीठ ने कहा, ‘‘अपीलकर्ता पिछले 22 महीनों से जेल में है। अपीलकर्ता ने जमानत के लिए मामला बनाया है। सुनवाई अदालत द्वारा लगाए गए नियमों और शर्तों के अधीन जमानत दी जाती है।’’

महाराष्ट्र सरकार ने जमानत देने का विरोध किया और कहा कि अन्य सह-आरोपियों के साथ समानता का आधार अग्रवाल के मामले पर लागू नहीं होगा।

शीर्ष अदालत ने अग्रवाल को मामले में किसी भी गवाह से संपर्क करने से रोक दिया और निचली अदालत को मुकदमे को शीघ्र पूरा करने का निर्देश दिया।

शीर्ष अदालत ने नाबालिग के रक्त के नमूनों के साथ कथित रूप से छेड़छाड़ करने के आरोप में गिरफ्तार एक डॉक्टर को 27 फरवरी को जमानत दे दी थी।

न्यायालय ने समानता के आधार पर ससून जनरल अस्पताल के पूर्व चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अजय तावड़े को राहत दी थी।

अदालत ने दो फरवरी को मामले में तीन आरोपियों को यह कहते हुए जमानत दे दी कि नाबालिगों से जुड़ी ऐसी घटनाओं के लिए माता-पिता दोषी हैं क्योंकि उनका अपने बच्चों पर नियंत्रण नहीं है।

भाषा आशीष प्रशांत

प्रशांत