भुवनेश्वर, 10 जनवरी (भाषा) ओडिशा के पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने अपने अतिथि गृहों में चारपहिया वाहनों के लिए लगाए गए 500 रुपये के पार्किंग शुल्क को वापस लेने की किसी भी संभावना से इनकार करते हुए कहा कि यह निर्णय पार्किंग की जगह के बेहतर इस्तेमाल और प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है।
एसजेटीए के मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी ने कहा कि प्रशासन के आकलन में सामने आया है कि भक्त निवासों में प्रतिदिन अधिकतम 10 वाहन ही खड़े किए जाते हैं और वहां ठहरने वाले आगंतुक चारपहिया वाहनों के लिए यह शुल्क वहन कर सकते हैं।
विपक्षी बीजू जनता दल (बीजद) ने शुल्क को तत्काल वापस लेने की मांग की थी और साथ ही यह अनुमान जताया गया कि पार्किंग शुल्क के बढ़ने से पुरी में पर्यटकों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है। इसके बाद ही एसजेटीए का यह बयान आया है।
पाढ़ी ने कहा, “भक्त निवासों में 500 रुपये का पार्किंग शुल्क लागू किए जाने के बाद हो रहे विरोध से हम अवगत हैं। बहुत कम लोग अपने चारपहिया वाहनों से आते हैं और वे आसानी से 500 रुपये का शुल्क दे सकते हैं।”
उन्होंने स्पष्ट किया कि भक्त निवासों में ठहरने वाले श्रद्धालु चाहें तो अपने वाहन किसी अन्य पार्किंग स्थल पर भी खड़े कर सकते हैं। इसके लिए प्रशासन की ओर से कोई आपत्ति नहीं है।
एसजेटीए प्रशासक ने कहा, “जगन्नाथ वल्लभ पार्किंग स्थल का शुल्क 250 रुपये है। कोई भी वहां अपना वाहन खड़ा कर सकता है।”
उन्होंने यह भी कहा कि भक्त निवासों में कमरों का किराया होटल की तुलना में अपेक्षाकृत कम है।
उन्होंने कहा, “यदि कमरे का किराया बढ़ाया गया तो इसका सीधा असर श्रद्धालुओं पर पड़ेगा, इसलिए आवास शुल्क बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।’’
एक अधिसूचना में एसजेटीए ने कहा कि उसके चार ‘भक्त निवास’ में ठहरने वाले अतिथियों को 24 घंटे के लिए चार पहिया वाहन खड़ा करने पर 18 प्रतिशत जीएसटी (माल एवं सेवा कर) सहित 500 रुपये का भुगतान करना होगा।
भाषा खारी गोला
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