नकद के बदले सवाल: लोकपाल को महुआ मोइत्रा के खिलाफ मामले में निर्णय लेने के लिए मिला और समय

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नकद के बदले सवाल: लोकपाल को महुआ मोइत्रा के खिलाफ मामले में निर्णय लेने के लिए मिला और समय

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  • Publish Date - January 23, 2026 / 04:42 PM IST,
    Updated On - January 23, 2026 / 04:42 PM IST

नयी दिल्ली, 23 जनवरी (भाषा)दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को लोकपाल को कथित ‘नकदी के बदले सवाल ’ मामले में तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा के खिलाफ सीबीआई को आरोप पत्र दाखिल करने की मंजूरी देने के मुद्दे पर विचार करने के लिए और दो महीने का समय दिया है।

न्यायमूर्ति अनिल क्षेत्रपाल और न्यायमूर्ति हरीश वैद्यनाथन शंकर की पीठ ने कहा कि इसी के साथ स्पष्ट किया कि अब समय बढ़ाने के किसी भी अनुरोध स्वीकार नहीं किया जाएगा।

तृणमूल कांग्रेस नेता मोइत्रा और केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की ओर से पेश हुए वकीलों ने कहा कि वे लोकपाल की ओर से आरोप पत्र दाखिल करने की मंजूरी देने के लिए और दो महीने का समय मांगने का विरोध नहीं कर रहे हैं।

पीठ ने आदेश दिया, ‘‘लोकपाल द्वारा मामले को निस्तारित करने की अवधि दो महीने के लिए बढ़ाई जाती है एवं इसके बाद समय बढ़ाने के किसी भी अनुरोध को स्वीकार नहीं किया जाएगा।’’

उच्च न्यायालय ने 19 दिसंबर, 2025 को लोकपाल द्वारा नवंबर में दिये गए उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें सीबीआई को मोइत्रा के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल करने की मंजूरी दी गई थी। अदालत ने उससे कहा कि लोकपाल अधिनियम की धारा 20 के तहत मंजूरी के मुद्दे पर प्रावधानों के अनुसार एक महीने की अवधि के भीतर विचार करे।

अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम, 2013 के तहत स्पष्ट रूप से अनिवार्य प्रक्रिया से ‘स्पष्ट विचलन’ हुआ है और लोकपाल ने अधिनियम के प्रावधानों की अपनी समझ और व्याख्या में गलती की थी।

आरोप है कि मोइत्रा ने लोकसभा में एक व्यवसायी से नकदी और उपहार के बदले सवाल पूछे थे।

भाषा धीरज माधव

माधव