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Ranjeet Ranjan in Rajya Sabha: दिल्ली: छात्राओं की शिक्षा और सुरक्षा को लेकर अक्सर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत कई बार इन दावों से बिल्कुल अलग दिखाई देती है। यह कहना है कांग्रेस का। दरअसल, कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर राज्यसभा में गंभीर सवाल उठाया गया है। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता Ranjeet Ranjan ने सदन में कहा कि देश में आज भी हजारों स्कूल ऐसे हैं जहां छात्राओं के लिए बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने खास तौर पर छत्तीसगढ़ का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां हजारों सरकारी स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग शौचालय तक नहीं है, जो बेहद चिंता का विषय है।
राज्यसभा में मुद्दा उठाते हुए उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में 5,000 से ज्यादा सरकारी स्कूल ऐसे हैं जहां छात्राओं के लिए अलग से शौचालय की व्यवस्था नहीं है। इस मामले को गंभीर मानते हुए Chhattisgarh High Court ने भी राज्य सरकार से जवाब मांगा है। सांसद ने कहा कि सरकार की ओर से ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ जैसे अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन अगर स्कूलों में ही लड़कियों के लिए जरूरी सुविधाएं नहीं होंगी तो उनकी पढ़ाई प्रभावित होना तय है। कई जगहों पर स्थिति ऐसी है कि छात्राओं को मजबूरी में स्कूल छोड़ना पड़ जाता है, क्योंकि स्वच्छता और सुरक्षा से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि यह समस्या सिर्फ एक राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई हिस्सों में यही हाल है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक देशभर में करीब 10,000 स्कूल ऐसे हैं जहां शौचालय की सुविधा नहीं है। वहीं UNICEF की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत के करीब 22 प्रतिशत स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग शौचालय नहीं है। इस स्थिति को गंभीर बताते हुए उन्होंने सरकार से मांग की कि पूरे देश में स्कूलों का व्यापक सर्वे कराया जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि हर स्कूल में छात्राओं के लिए अलग और स्वच्छ शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हों, ताकि बेटियां बिना किसी परेशानी के अपनी पढ़ाई जारी रख सकें।
बता दें कि, सांसद के इस स्पीच को कांग्रेस ने अपने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया है। कांग्रेस ने लिखा, ‘हमारे देश में छात्राओं के लिए बुनियादी सुविधाओं की भारी कमी है। सरकारी मंचों से ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ की बात की जाती है, लेकिन जमीनी हालत बहुत ही ख़राब है। छत्तीसगढ़ में 5,000 से ज्यादा सरकारी स्कूलों में अलग से शौचालय नहीं है, जिसपर हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है। ये बात सिर्फ एक राज्य की नहीं है, बल्कि देश के अलग-अलग राज्यों में छात्राओं के लिए शौचालय नहीं है, इस वजह से बच्चियां स्कूल छोड़ने को मजबूर हो जाती हैं। देश के 10,000 स्कूल शौचालय विहीन हैं और यूनिसेफ के मुताबिक देश के 22% स्कूलों में छात्राओं के लिए शौचालय नहीं है। सरकार से आग्रह है कि देशभर के स्कूलों में एक सर्वे कराया जाए और बुनियादी जरूरतों के साथ, स्वच्छता से जुड़ी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं’।