राघव चड्ढा ने भारत के डिजिटल बदलाव की उज्बेकिस्तान सम्मेलन में सराहना की

Ads

राघव चड्ढा ने भारत के डिजिटल बदलाव की उज्बेकिस्तान सम्मेलन में सराहना की

  •  
  • Publish Date - September 6, 2026 / 09:41 PM IST,
    Updated On - September 6, 2026 / 09:41 PM IST

नयी दिल्ली, छह सितंबर (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद राघव चड्ढा ने रविवार को भारत के डिजिटल बदलाव के अनुभव के साथ-साथ इस बात को भी रेखांकित किया कि प्रौद्योगिकी किस तरह किसी को बाहर किए बिना पहुंच का दायरा बढ़ाने में मदद कर रही है।

चड्ढा ने उज्बेकिस्तान के समरकंद में 12वें आईपीयू वैश्विक युवा सांसद सम्मेलन को ‘डिजिटल युग में डिजिटल पहुंच और अधिकार’ विषय पर संबोधित करते हुए कहा कि इस दौर की असली कसौटी यह नहीं है कि मशीन कितनी स्मार्ट हो जाती हैं, बल्कि यह है कि सबसे सस्ता फोन रखने वाले व्यक्ति को भी क्या वही पहुंच और अवसर मिलते हैं जो अन्य सभी को उपलब्ध हैं।

चड्ढा ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘एक अरब से अधिक लोगों के जुड़े होने और यूपीआई के जरिये तत्काल भुगतान के दैनिक जीवन का हिस्सा बनने के साथ भारत ने दिखाया है कि डिजिटल स्तर और समावेशन साथ-साथ चल सकते हैं। मैंने बताया कि प्रौद्योगिकी किस तरह पहुंच बढ़ा रही है और ऐसा भविष्य बना रही है जो बिना किसी को बाहर किए जोड़ता है, बिना शोषण किए नवाचार करता है और बिना नियंत्रण किए सुरक्षा प्रदान करता है।’’

उन्होंने इंटरनेट कनेक्टिविटी के विस्तार, किफायती डेटा, यूपीआई, डेटा संरक्षण और उभरती प्रौद्योगिकियों के जिम्मेदार नियमन के जरिये भारत के डिजिटल बदलाव को रेखांकित किया।

चड्ढा ने अपने संबोधन में भारत-उज्बेकिस्तान संबंधों को हाल में ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ के स्तर तक बढ़ाए जाने का उल्लेख किया और भारत के यूपीआई को उज्बेकिस्तान की यूजेडक्यूआर प्रणाली से जोड़ने के समझौते को अंतरराष्ट्रीय डिजिटल सहयोग के एक व्यावहारिक मॉडल के रूप में पेश किया।

उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था शुरू होने के बाद उज्बेकिस्तान में कोई भारतीय छात्र या यात्री देश की किसी भी दुकान पर यूजेडक्यूआर कोड को यूपीआई ऐप से स्कैन करके भारतीय बैंक खाते से सीधे भुगतान कर सकेगा—न अलग कार्ड की जरूरत होगी, न नकदी की, न विदेशी मुद्रा पर अतिरिक्त शुल्क की और न ही किसी अन्य जटिलता की।

चड्ढा ने 2015 में भारत सरकार द्वारा शुरू की गई डिजिटल इंडिया पहल से आए बदलाव का उल्लेख करते हुए कहा कि देश में इंटरनेट ग्राहकों की संख्या 2014 के 25 करोड़ से बढ़कर अब एक अरब से अधिक हो गई है, जबकि प्रति जीबी डेटा की कीमत 2014 के 269 रुपये से घटकर अब आठ रुपये रह गई है, जो 97 प्रतिशत की कमी है।

उन्होंने यूपीआई को एक ऐसे डिजिटल तंत्र का उदाहरण बताया, जिसका स्वामित्व किसी एक बैंक या प्रौद्योगिकी कंपनी के पास नहीं है। उन्होंने कहा कि यूपीआई के पहले महीने में 2016 में 90,000 लेनदेन हुए थे, जो वित्त वर्ष 2025-26 में बढ़कर 240 अरब से अधिक लेनदेन हो गए, जिनका कुल मूल्य 314 ट्रिलियन रुपये रहा।

उन्होंने कहा, ‘‘ये आंकड़े उपलब्धि नहीं हैं। उपलब्धि यह है कि कोई रेहड़ी-पटरी वाला इस तकनीक का इस्तेमाल करके पांच रुपये या उससे भी कम राशि प्राप्त कर सकता है, गांव में काम करने वाला व्यक्ति कुछ ही सेकंड में घर पैसे भेज सकता है और कोई महिला अपनी आमदनी से अपना छोटा कारोबार चला सकती है।’’

भाजपा सांसद ने अपने संबोधन में कहा, ‘‘डिजिटल युग की असली कसौटी यह नहीं होगी कि मशीन कितनी उन्नत हो जाती हैं, बल्कि यह होगी कि सबसे पिछड़े जिले में सबसे सस्ता फोन रखने वाली युवा महिला को भी क्या वही डेटा संरक्षण, वही डेटा पहुंच और वही डिजिटल अधिकार मिलते हैं, जो हर किसी को उपलब्ध हैं।’’

भाषा अमित सुरेश

सुरेश