नयी दिल्ली, 26 अगस्त (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने ‘पितृसत्ता को खत्म करने’ संबंधी बयान के लिए बुधवार को लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की आलोचना की और आरोप लगाया कि उन्होंने खुद को ‘मीम और रील’ तक सीमित कर लिया है। इसके अलावा भाजपा ने महिला सशक्तीकरण से जुड़े उनके रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल उठाए।
यह बयान तब आया जब शनिवार को गांधी ने ‘मनुस्मृति संबंधी सोच’ की आलोचना की और छात्राओं से ‘पितृसत्ता को खत्म करने’ का आग्रह किया। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर उनकी उस टिप्पणी को लेकर तंज कसा, जिसमें उन्होंने जंतर-मंतर पर जुलाई 2026 के विरोध प्रदर्शन के दौरान लड़कियों की ओर से अपशब्दों के इस्तेमाल पर हैरानी जताई थी।
पुणे में अपने ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम के दौरान छात्राओं से बातचीत करते हुए गांधी ने कहा था कि महिलाएं अपनी खुद की मालिक हैं, न कि अपने पिता, पति या बेटों की। उन्होंने मनुस्मृति की इस बात को शर्मनाक बताया कि महिला को जीवन के हर चरण में किसी न किसी पुरुष रिश्तेदार के अधिकार में रहना चाहिए।
गांधी के बयानों के बाद से ही भाजपा ने उन पर हमले तेज कर दिए हैं। बुधवार को यहां एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए वरिष्ठ भाजपा नेता और सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा कि गांधी एक ‘गलत विमर्श’ गढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि न तो उनके पास कोई दृष्टिकोण है और न ही कोई सकारात्मक एजेंडा।
इस दौरान स्वराज ने कहा, ‘‘राहुल गांधी जी के पास न तो कोई दृष्टिकोण है और न ही कोई सकारात्मक एजेंडा। इसलिए उनकी शोध टीम कागज की पर्ची पर जो कुछ भी लिखकर उन्हें दे देती है, वे उसी का इस्तेमाल युवाओं और देश के मतदाताओं को गुमराह करने के लिए करते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘यह विपक्ष के नेता को शोभा नहीं देता। ऐसा लगता है कि राहुल गांधी अब सिर्फ ‘मीम और रील’ के लिए बयान देते हैं।’’
स्वराज ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के बारे में गांधी के कथित बयानों को लेकर भी उन पर हमला किया और कहा कि ये बातें नेता प्रतिपक्ष के लिहाज से अशोभनीय थीं।
स्वराज ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर कांग्रेस के रुख को लेकर भी हमला बोला, जिसमें लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है।
स्वराज ने आरोप लगाया, “राहुल गांधी जी महिलाओं को केवल मतदान केंद्रों पर वोट देने वाली मतदाता तक सीमित रखना चाहते हैं। वह नहीं चाहते कि भारत की बेटियां देश के भविष्य को आकार देने वाली बनें।’’
उन्होंने गांधी पर महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर ‘चुनिंदा आक्रोश’ दिखाने का आरोप लगाया और धर्म के संदर्भ में महिला अधिकारों को लेकर उनके रुख पर सवाल उठाए।
स्वराज ने कहा, ‘‘वे ‘मनुस्मृति संबंधी सोच’ की बात करते हैं। मैं राहुल गांधी जी से कहना चाहती हूं कि आप चुनिंदा आक्रोश दिखा रहे हैं। हमारा संविधान सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान की सीख देता है। राहुल गांधी जी निश्चित रूप से संविधान दिखाते हैं, लेकिन उसे खोलकर पढ़ने की जहमत कभी नहीं उठाते। यह चुनिंदा आक्रोश क्यों? आपका ‘पितृसत्ता को खत्म करने’ का अभियान धर्म के आधार पर अपना रंग क्यों बदल लेता है?’’
भाषा संतोष अविनाश
अविनाश