CM Sambal Scheme 2.0/Image Credit: AI
CM Sambal Scheme 2.0: भोपाल: प्रदेश के श्रमिक अपने खून-पसीने से विकसित मध्यप्रदेश की नींव तैयार कर एक-एक ईंट जोड़ रहे हैं। इसलिए हर परिस्थिति में श्रमिकों की कठिनाई को दूर करने का फर्ज भी सरकार निभा रही है। भले ही श्रमिक परिवारों पर विपत्ति आने, घर चलाने वाले के असामयिक निधन, अचानक आर्थिक संकट आने पर लोग साथ छोड़ दें, लेकिन मोहन सरकार इनका साथ कभी नहीं छोड़ती। मुश्किल समय में श्रमिकों को मुख्यमंत्री संबल योजना 2.0 आर्थिक सहारा देती है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रक्षाबंधन से पहले योजना के तहत दी जाने वाली अनुग्रह सहायता राशि की 11वीं किश्त के रूप में 203 करोड़ रुपये की सहायता राशि सिंगल क्लिक से पात्र हितग्राहियों के खातों में ट्रांसफर की।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि, राज्य सरकार श्रमिकों के सम्मान और सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रख रही है। उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश, देश का पहला ऐसा राज्य बना है, जहां श्रम शक्ति संहिता लागू की गई है। इसके साथ ही सरकार ने श्रम स्टार रेटिंग की शुरुआत भी हमने की है, ताकि श्रमिकों के सम्मान और सुरक्षा से कोई समझौता न हो। उन्होंने कहा कि हम श्रमिकों को उनके हुनर परिष्कृत कर मेहनत से आगे बढ़ना चाहते हैं। श्रमिकों को सहकारिता से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से श्रमणा योजना की शुरुआत की गई है। (CM Sambal Scheme 2.0) संबल योजना के तहत सामान्य मृत्यु पर 2 लाख रु और दुर्घटना में मृत्यु पर 4 लाख रु की सहायता दी जाती है। वहीं आंशिक स्थायी दिव्यांगता पर 1 लाख और स्थायी दिव्यांगता पर 2 लाख रु की सहायता का प्रावधान है। अंत्येष्टि सहायता के लिए भी 5 हजार रु दिए जाते हैं। श्रमिक परिवारों के बच्चों की मेडिकल, कानून, इंजीनियरिंग और पॉलीटेक्निक जैसी पढ़ाई में मदद और संबल हितग्राहियों को आयुष्मान भारत निरामयम् योजना से जोड़ने जैसे कदम भी उठाए गए हैं। श्रमिकों के सम्मान और सुरक्षा के लिए संबल योजना पर सियासत भी हो रही है विपक्ष योजना पर सवाल उठा रहा है तो वहीं सत्ता पक्ष योजना की तारीफ करते हुए विपक्ष को आईना दिखा रहा है
CM Sambal Scheme 2.0: मोहन सरकार संबल योजना के अलावा भी श्रमिकों के सम्मान और उनकी सुरक्षा का ध्यान रख रही है। अलग-अलग योजनाओं से उन्हें लाभान्वित किया जा रहा है। श्रमिकों को प्रदेश में हर व्यक्ति के तरह ही सभी अधिकार मिल रहे हैं। यही कारण है कि मोहन सरकार सदैव श्रमिकों के साथ हर एक परिस्थिति में साथ खड़ी नजर आती है।
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