Rahul Gandhi Lok Sabha Speech: ‘अगर ट्रंप से बात होती, हम ये कहते…’, लोकसभा में राहुल गांधी का बड़ा बयान, कहा- डॉलर बचाना चाहते हैं?

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Rahul Gandhi Lok Sabha Speech: 'अगर ट्रंप से बात होती, हम ये कहते…', लोकसभा में राहुल गांधी का बड़ा बयान, कहा- डॉलर बचाना चाहते हैं?

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  • Publish Date - February 11, 2026 / 02:16 PM IST,
    Updated On - February 11, 2026 / 02:17 PM IST

Rahul Gandhi Lok Sabha Speech/Image Source: ANI

HIGHLIGHTS
  • लोकसभा में राहुल गांधी का बयान
  • कहा- सबसे बड़ी एसेट है भारतीय लोग
  • ट्रंप को सबसे पहले इंडियन डेटा याद दिलाते- राहुल गांधी

नई दिल्ली: Rahul Gandhi Lok Sabha Speech:  आज संसद के बजट सत्र का 11वां दिन है। पिछले दिनों कांग्रेस ने आरोप लगाया, (Rahul Gandhi Parliament Speech Live) लोकसभा स्पीकर ने उन्हें बोलने का मौक़ा नहीं दिया तो वही आज राहुल गांधी केंद्र की सरकार पर अलग-अलग मुद्दों पर जमकर निशाना साध रहे हैं।

संसद में राहुल गांधी का बयान (Rahul Gandhi Parliament Speech Live)

लोकसभा में बोलते हुए उन्होंने कहा कि अगर INDIA अलायंस प्रेसिडेंट ट्रंप के साथ बातचीत कर रहा होता। मैं आपको बताता हूँ कि हम क्या कहते। सबसे पहले हम प्रेसिडेंट ट्रंप से कहते, इस इक्वेशन में सबसे ज़रूरी चीज़ इंडियन डेटा है। आप अपना डॉलर बचाना चाहते हैं? हम आपके दोस्त हैं। हम आपकी तारीफ़ करते हैं।

Rahul Gandhi Lok Sabha Speech:  राहुल गांधी ने आगे कहा कि हम आपके डॉलर को बचाने में आपकी मदद करना चाहते हैं। लेकिन प्लीज़ याद रखें कि अगर आप अपना डॉलर बचाना चाहते हैं, तो सबसे बड़ी एसेट जो आपके डॉलर को बचा सकती है, वो है इंडियन लोगों के पास।

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"Rahul Gandhi Parliament Speech Live" में उन्होंने किस मुद्दे पर सरकार को घेरा?

राहुल गांधी ने बजट सत्र के दौरान केंद्र सरकार को कई मुद्दों पर घेरा, खासतौर पर विदेश नीति, डेटा की अहमियत और अमेरिका के साथ भारत के संबंधों को लेकर अपनी बात रखी।

"Rahul Gandhi on Trump and Indian Data" बयान का क्या मतलब है?

उन्होंने कहा कि अगर INDIA अलायंस अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप से बातचीत करता, तो भारतीय डेटा को सबसे बड़ी ताकत बताते और इसे डॉलर को बचाने वाली सबसे अहम एसेट कहते।

"Budget Session Rahul Gandhi Speech" क्यों चर्चा में है?

यह भाषण इसलिए चर्चा में है क्योंकि राहुल गांधी ने सीधे तौर पर वैश्विक राजनीति, अमेरिकी डॉलर और भारतीय लोगों के डेटा की ताकत को जोड़ते हुए एक अलग नजरिया पेश किया।