कोटा, 14 अप्रैल (भाषा) बूंदी जिला प्रशासन ने बाल विवाह की सूचना पर त्वरित कार्रवाई करते हुए मंगलवार को दो नाबालिग लड़कियों को बचाया। दोनों लड़कियों का 20 अप्रैल को विवाह होना था।
एक नाबालिग लड़के के माता-पिता को भी तब तक उसका विवाह करने से रोक दिया गया, जब तक कि वह शादी की कानूनी उम्र पूरी नहीं कर लेता।
अक्षय तृतीया के दौरान बड़ी संख्या में बाल विवाह की आशंका के मद्देनजर बूंदी जिला प्रशासन बेहद सतर्क है और उसने निगरानी बढ़ा रखी है। माना जाता है कि इस दिन जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में गुर्जर, सैनी, मीणा, बैरवा और कहार समुदायों में बड़ी संख्या में बाल विवाह होते हैं।
बाल विवाह की योजना की गोपनीय सूचना मिलने पर तहसीलदार नरोत्तम, रायथल थाना प्रभारी हरलाल और ‘चाइल्डलाइन’ के एक संयुक्त दल ने मौके पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाए और दोनों स्थानों पर वैवाहिक कार्यक्रमों को रुकवा दिया।
जांच में पता चला कि लड़कियों की उम्र 17 और 15 वर्ष है और वे क्रमशः कक्षा 12 और 10 की छात्राएं हैं। दोनों लड़कियों को बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष पेश किया गया, जिसने उन्हें आगामी कानूनी निर्देशों तक आश्रय गृह भेजने का आदेश दिया।
सीडब्ल्यूसी की अध्यक्ष सीमा पोद्दार ने बताया कि इस संबंध में कानूनी कार्यवाही शुरू कर दी गई है। उन्होंने यह भी कहा कि अदालत ने दोनों लड़कियों के माता-पिता को उनकी वैधानिक आयु पूरी होने तक विवाह कराने से रोकने के लिए निषेधाज्ञा की कार्यवाही शुरू कर दी है।
एक अन्य महत्वपूर्ण मामले में बूंदी सदर थाना क्षेत्र के एक गांव की 12वीं कक्षा की 16 वर्षीय छात्रा ने अपनी शादी खुद रुकवाकर साहस का परिचय दिया।
छात्रा ने मंगलवार सुबह सीडब्ल्यूसी अध्यक्ष से संपर्क कर हस्तक्षेप की मांग की थी। उसने बताया कि वह अपनी पढ़ाई जारी रखना चाहती है, जबकि उसके माता-पिता ने एक मई को खानखेड़ा गांव में होने वाले एक सामूहिक विवाह सम्मेलन में उसकी शादी तय कर दी है।
सूचना मिलते ही चाइल्डलाइन और स्थानीय पुलिस का दल मौके पर पहुंचा और उसे वहां से निकाला।
पोद्दार ने बताया कि परिजनों के कड़े विरोध के बावजूद उनका दल नाबालिग को सुरक्षित ले जाने में सफल रहा। परामर्श के बाद नाबालिग को आश्रय गृह भेज दिया गया।
अधिकारियों के अनुसार, बूंदी जिले में पिछले कुछ दिनों में यह चौथी घटना है जहां किसी नाबालिग लड़की ने खुद अपनी शादी रुकवाने के लिए कदम उठाया है। प्रशासन इसे लड़कियों के बीच बढ़ती जागरूकता, आत्मविश्वास और अधिकारों के प्रति सजगता के सकारात्मक संकेत के रूप में देख रहा है।
प्रशासन ने दोहराया है कि बाल विवाह रोकना एक सामूहिक सामाजिक जिम्मेदारी है। नागरिकों से अपील की गई है कि वे ऐसे मामलों की सूचना चाइल्ड हेल्पलाइन नंबर 1098 या नजदीकी अधिकारियों को दें।
भाषा सुमित पवनेश
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