स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों में नल से जल उपलब्ध कराने में राजस्थान, बंगाल पीछे : संसदीय समिति
स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों में नल से जल उपलब्ध कराने में राजस्थान, बंगाल पीछे : संसदीय समिति
नयी दिल्ली, 18 मार्च (भाषा) संसद की एक समिति ने स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में नल से जल उपलब्ध कराने में राजस्थान और पश्चिम बंगाल के पिछड़ने का उल्लेख करते हुए केंद्र से इन राज्यों के साथ समन्वय करने तथा काम में तेजी लाने का आग्रह किया है।
संसद में पेश अपनी रिपोर्ट में, जल संसाधन संबंधी स्थायी संसदीय समिति ने कहा कि स्कूलों, आंगनवाड़ी केंद्रों और आश्रमशालाओं जैसे संस्थानों में नल से जल के कनेक्शन उपलब्ध कराना जल जीवन मिशन का एक प्रमुख घटक है, जिसका बच्चों के स्वास्थ्य, सीखने की क्षमता और समग्र कल्याण पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
समिति ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि 11 फरवरी 2026 तक देश भर में 9,23,297 (89.62 प्रतिशत) स्कूलों और 9,66,876 (85.60 प्रतिशत) आंगनवाड़ी केंद्रों को पेयजल कनेक्शन उपलब्ध कराया जा चुका है।
हालांकि, समिति ने पाया कि कुछ राज्यों, विशेषकर राजस्थान में, कार्य की गति तेज करने की आवश्यकता है क्योंकि केवल 57.75 प्रतिशत स्कूलों में ही नल से पानी पहुंचाया जा सका है।
इसी प्रकार, पश्चिम बंगाल में 1,11,074 आंगनवाड़ी केंद्रों में से केवल 41,895 (37.72 प्रतिशत) को ही नल से जल के कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं, जबकि राजस्थान में इसका दायरा 53.67 प्रतिशत है।
यह देखते हुए कि बच्चे विशेष रूप से जलजनित बीमारियों के प्रति संवेदनशील होते हैं तथा वे स्कूलों और आंगनवाड़ी केंद्रों में काफी समय बिताते हैं, समिति ने पिछड़े राज्यों के साथ समन्वय में काम करने का पेयजल और स्वच्छता विभाग से आग्रह किया है।
समिति ने केंद्रीय नोडल अधिकारियों द्वारा पाई गई गंभीर कमियों की ओर भी इशारा किया, जिनमें मणिपुर और गुजरात के ऐसे मामले शामिल हैं, जहां कागजों पर तो योजनाएं दिखती हैं लेकिन जलापूर्ति की व्यवस्था जमीनी स्तर पर मौजूद नहीं हैं।
समिति ने निगरानी तंत्र को मजबूत करने और दोषियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की अनुशंसा की।
रिपोर्ट के अनुसार, जल जीवन मिशन के तहत स्वीकृत योजनाओं में से अब तक केवल 52 प्रतिशत ही पूरी हुई हैं।
समिति ने कहा कि पश्चिम बंगाल, राजस्थान, मध्यप्रदेश और केरल जैसे राज्य बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवारों को नल से जल का कनेक्शन उपलब्ध कराने में पिछड़ रहे हैं।
रिपोर्ट में, समिति ने विभाग से आग्रह किया कि वह राज्यों के साथ मिलकर बाधाओं को दूर करने और समय पर कार्यान्वयन सुनिश्चित करने के लिए काम करे।
समिति ने यह भी सिफारिश की है कि नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) से स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) का प्रदर्शन ऑडिट करने का अनुरोध किया जाए। उसने उल्लेख किया कि योजना को मार्च 2027 तक बढ़ा दिया गया है और इस तरह की कवायद से विभिन्न स्तरों पर कमियों की पहचान करने और इसकी दीर्घकालिक स्थिरता में सुधार करने में मदद मिलेगी।
समिति ने जल संसाधन, नदी विकास और गंगा पुनरुद्धार विभाग के लिए वर्ष 2026-27 के बजटीय आवंटन में लगभग 21 प्रतिशत की कमी और 2025-26 में निधियों के कम उपयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए बेहतर वित्तीय प्रबंधन और संसाधनों के अधिकतम उपयोग का आग्रह किया।
अटल भूजल योजना के बंद होने पर गौर करते हुए, समिति ने सिफारिश की कि सरकार भूजल प्रबंधन चुनौतियों से निपटने के लिए योजना को जारी रखने या इसी तरह की कोई और पहल करने पर विचार करे।
भाषा सुभाष अविनाश
अविनाश

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