राजस्थान : मोबाइल फोन नहीं मिलने पर घर छोड़कर निकला बालक, ट्रेन में मिला

Ads

राजस्थान : मोबाइल फोन नहीं मिलने पर घर छोड़कर निकला बालक, ट्रेन में मिला

  •  
  • Publish Date - May 10, 2026 / 09:07 PM IST,
    Updated On - May 10, 2026 / 09:07 PM IST

जयपुर, 10 मई (भाषा) मोबाइल फोन इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं मिलने से नाराज होकर 13 वर्षीय एक बालक घर छोड़कर शनिवार को दिल्ली से जयपुर आ रही डबल डेकर एक्सप्रेस में सवार हो गया।

ट्रेन में तैनात टिकट परीक्षकों (टीटीई) की सतर्कता से बच्चे को सुरक्षित बरामद कर उसके परिजनों को सूचना दी गई तथा बाद में उसे रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) अलवर को सौंप दिया गया। उत्तर पश्चिम रेलवे जयपुर मंडल ने रविवार को यह जानकारी दी।

उत्तर-पश्चिम रेलवे जयपुर की वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक पूजा मित्तल ने बताया कि नौ मई को गाड़ी संख्या 12986 डबल डेकर एक्सप्रेस में टीटीई अंकित महर और नरेंद्र वर्मा की ड्यूटी कोच सी-3 से सी-10 तक थी।

उन्होंने बताया कि ट्रेन के दिल्ली से रवाना होने के कुछ देर बाद टिकट जांच के दौरान दोनों टीटीई को एक कोच में 13 वर्षीय बालक बिना टिकट यात्रा करता मिला।

पूछताछ में बालक ने खुद को इटावा के जसवंतपुर का निवासी बताया और कहा कि वह बिना परिजनों को बताए घर से निकल आया है। कारण पूछने पर उसने बताया कि परिजनों ने उसे मोबाइल फोन चलाने की अनुमति नहीं दी थी, जिससे नाराज होकर वह घर छोड़कर ट्रेन में बैठ गया।

मित्तल ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए टीटीई अंकित महर ने तुरंत जयपुर मंडल के वाणिज्य प्रबंधक जगदीश कुमार को इसकी सूचना दी। इसके बाद बालक के पिता से संपर्क किया गया और इटावा पुलिस को भी मामले की जानकारी दी गई।

रेलवे कर्मचारियों ने बालक को समझाकर सुरक्षित संरक्षण में लिया और आगे की कार्रवाई के लिए उसे रेलवे सुरक्षा बल, अलवर को सौंप दिया।

उन्होंने बताया कि इसी दौरान उसी ट्रेन में कुछ यात्रियों ने टीटीई स्टाफ से शिकायत की कि एक युवक टिकट जांच के नाम पर उनसे पैसे वसूल रहा है, लेकिन किसी प्रकार की रसीद नहीं दे रहा।

शिकायत मिलते ही टीटीई स्टाफ सतर्क हो गया और तुरंत नियंत्रण कक्ष को सूचना दी गई। कुछ देर बाद युवक को पकड़ लिया गया।

जांच में सामने आया कि वह फर्जी टीटीई बनकर यात्रियों से अवैध वसूली कर रहा था। रेलवे कर्मचारियों ने उसे मौके पर ही पकड़कर कार्रवाई के लिए रेलवे सुरक्षा बल, अलवर को सौंप दिया।

भाषा

बाकोलिया रवि कांत