जयपुर, 31 अगस्त (भाषा) राजस्थान में शहरी निकाय चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की समयसीमा सोमवार को समाप्त हो गई। अंतिम दिन काफी गहमागहमी रही और भाजपा ने जयपुर के उम्मीदवारों की घोषणा नामांकन की समयसीमा खत्म होने से कुछ घंटे पहले की, जबकि कांग्रेस ने उम्मीदवारों की सूची सार्वजनिक किए बिना ही अपने प्रत्याशियों से नामांकन दाखिल करवा दिया।
कांग्रेस की इस रणनीति के कारण टिकट के दावेदार अंतिम समय तक असमंजस में रहे और संभावित बागियों को निर्दलीय चुनाव लड़ने के लिए बहुत कम समय मिल पाया।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने नामांकन प्रक्रिया के अंतिम चरण में जयपुर, जोधपुर, कोटा और अजमेर नगर निगमों के लिए उम्मीदवारों की घोषणा की। जयपुर में पार्टी ने 150 में से 145 वार्डों के लिए प्रत्याशियों के नाम घोषित किए, जबकि शेष पांच वार्डों में कांग्रेस की रणनीति अपनाते हुए उम्मीदवारों ने बिना औपचारिक घोषणा के नामांकन दाखिल किया।
जयपुर के वार्ड संख्या 76 में भाजपा उम्मीदवार को लेकर अंतिम दिन काफी भ्रम की स्थिति रही। पार्टी ने इस वार्ड से पूर्व उपमहापौर पुनीत कर्णावट को उम्मीदवार बनाया था। हालांकि, मालवीय नगर के विधायक कालीचरण सराफ ने चुनाव चिह्न के लिए पार्टी का अधिकृत पत्र कुलदीप मिश्रा को सौंप दिया, जिन्होंने भाजपा उम्मीदवार के रूप में नामांकन दाखिल कर दिया।
कर्णावट ने भी नामांकन दाखिल किया और कहा कि पार्टी ने उन्हें इस वार्ड से उम्मीदवार चुना है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, बाद में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के हस्तक्षेप के बाद पार्टी का अधिकृत पत्र कर्णावट के पक्ष में बहाल कर दिया गया।
दोनों प्रमुख दलों में टिकट वितरण को लेकर दबाव साफ नजर आया। भाजपा को अकेले जयपुर के 150 वार्डों के लिए करीब 2,500 आवेदन मिले थे।
जयपुर में भाजपा के प्रमुख उम्मीदवारों में वार्ड संख्या 110 से पूर्व महापौर ज्योति खंडेलवाल शामिल हैं। खंडेलवाल पहले कांग्रेस में थीं और 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा में शामिल हुई थीं।
वार्ड संख्या 112 में भाजपा ने निवर्तमान महापौर कुसुम यादव का टिकट काटकर पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष सुनील कोठारी को उम्मीदवार बनाया है। टिकट नहीं मिलने से कई दावेदारों में नाराजगी देखी गई।
एक महिला दावेदार टिकट न मिलने पर भावुक हो गईं। महिला ने आरोप लगाया कि जमीनी स्तर पर पार्टी के लिए काम करने वालों की अनदेखी कर चापलूसी करने वालों को तरजीह दी जा रही है।
वहीं, कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने जयपुर शहर कांग्रेस के अध्यक्ष सुनील शर्मा का पुतला फूंका और टिकट वितरण में अल्पसंख्यक समुदाय की अनदेखी करने का आरोप लगाया। प्रदर्शन कर रहे एक कार्यकर्ता ने कहा, ‘‘शर्मा ने अल्पसंख्यक समुदाय की अनदेखी की है।’’
दोनों दलों के कई दावेदारों ने टिकट मिलने की उम्मीद में पहले ही प्रचार शुरू कर दिया था और मतदाताओं से संपर्क करना शुरू कर दिया था।
पिछले कुछ दिनों में भाजपा को पाली, उदयपुर, भीलवाड़ा और अजमेर में उम्मीदवार चयन को लेकर विरोध और दलबदल का सामना करना पड़ा है। कांग्रेस को भी भीलवाड़ा समेत कई स्थानों पर टिकट वितरण को लेकर अंदरूनी मतभेदों का सामना करना पड़ा है।
बदले हुए वार्ड परिसीमन और आरक्षण की स्थिति ने उम्मीदवार चयन को और जटिल बना दिया। दोनों दलों को संगठन के प्रति निष्ठा, जीतने की क्षमता, जातीय एवं सामुदायिक प्रतिनिधित्व, पूर्व पार्षदों, नए चेहरों तथा विधायकों और वरिष्ठ नेताओं की सिफारिशों के बीच संतुलन बनाना पड़ा।
टिकट वितरण के दौरान दोनों दलों पर बगावत का खतरा भी बना रहा। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रविवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं को चेतावनी दी थी कि टिकट को लेकर मतभेद शहरी निकायों में बोर्ड गठन की पार्टी की संभावनाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
उदयपुर में पार्टी कार्यकर्ताओं से बातचीत के दौरान गहलोत ने कहा था, ‘‘अगर टिकटों की घोषणा के तुरंत बाद लड़ाई शुरू हो जाएगी तो बोर्ड कैसे बनेंगे? भाजपा ऐसे मतभेद पैदा करने के लिए तैयार बैठी है।’’
गहलोत ने कहा था कि टिकट उन उम्मीदवारों को दिए जाने चाहिए जो जमीनी स्तर पर मजबूत हों और जिनके जीतने की संभावना सबसे अधिक हो, न कि केवल वरिष्ठ नेताओं की सिफारिशों के आधार पर।
राजस्थान में 309 शहरी निकायों के 10,245 पार्षद पदों के लिए चुनाव हो रहे हैं। इनमें 10 नगर निगम, 51 नगर परिषद और 248 नगरपालिकाएं शामिल हैं।
राज्य निर्वाचन आयोग के अनुसार, 309 शहरी निकायों में मतदान दो चरणों में नौ और 11 सितंबर को होगा, जबकि मतगणना 14 सितंबर को की जाएगी। नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि तीन सितंबर है।
शहरी निकायों के अध्यक्षों का चुनाव 21 सितंबर को होगा। नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिकाओं की सामान्य बैठकें 22 सितंबर को आयोजित की जाएंगी। इन्हीं बैठकों में उपमहापौर, उपसभापति और नगरपालिका उपाध्यक्षों का चुनाव भी होगा।
इन शहरी निकायों में कुल 1.44 करोड़ मतदाता हैं और चुनाव के लिए 16,465 मतदान केंद्र बनाए जाएंगे।
भाषा
बाकोलिया राजकुमार रवि कांत