नयी दिल्ली, 31 अगस्त (भाषा) तृणमूल कांग्रेस के नेता साकेत गोखले ने सोमवार को कहा कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने दावा किया है कि दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन का इस्तेमाल मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं है।
राज्यसभा के पूर्व सदस्य ने कहा कि वह उच्चतम न्यायालय में अर्धसैनिक बल का जवाब सौंपेंगे।
‘एक्स’ पर एक पोस्ट में, गोखले ने सीआरपीएफ में दायर उनके ‘सूचना का अधिकार’ (आरटीआई) आवेदन की एक प्रति साझा की। इस अर्जी में उन्होंने 20 जुलाई को दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर द्रुत कार्य बल (आरएएफ) द्वारा ‘पैलेट एम्युनिशन’ (छर्रे वाली गोलियों) के इस्तेमाल के बारे में जानकारी मांगी थी। उस दिन ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (कॉजपा) के बुलावे पर छात्रों ने संसद तक मार्च निकाला था।
गोखले ने कहा, “सीआरपीएफ का कहना है कि दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन का इस्तेमाल मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं है। मैंने आरएएफ (जो सीआरपीएफ का ही एक हिस्सा है) के पास एक आरटीआई आवेदन दायर किया था, जिसमें 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन के इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी मांगी गई थी।”
उन्होंने कहा, “कानून के तहत, भ्रष्टाचार या मानवाधिकारों के उल्लंघन से जुड़े मामलों में सीआरपीएफ को आरटीआई अधिनियम के अपवादों से छूट मिली हुई है।”
हालांकि, सीआरपीएफ ने अपने जवाब में कहा कि “आवेदन में लगाए गए आरोपों पर मानवाधिकारों के उल्लंघन से संबंधित अपवाद लागू नहीं होता है।”
उन्होंने कहा, “सीआरपीएफ ने यह कहते हुए जानकारी देने से इनकार कर दिया कि दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन का इस्तेमाल मानवाधिकारों का उल्लंघन नहीं है। जब इसके खिलाफ अपील की गई, तो अपीलीय अथॉरिटी ने भी वही बहाना बनाकर फिर से जानकारी देने से मना कर दिया।”
उन्होंने केंद्र पर यह आरोप भी लगाया कि उसने शुरू में प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार करने की कोशिश की।
भाषा प्रशांत नरेश
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