जयपुर, 30 अप्रैल (भाषा) राजस्थान में मानव-तेंदुए के बीच बढ़ती संघर्ष की घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए वन विभाग ने सख्त मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की है।
अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक और मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक केसीए अरुण प्रसाद ने बताया कि शहर में तेंदुए की आवाजाही के बाद उसे पकड़ने में नियमों का उल्लंघन नहीं किए जाए इसलिए ये एसओपी जारी की गई है।
उन्होंने बताया कि एसओपी में वन अधिकारियों, टीमों, जिला प्रशासन और स्थानीय लोगों के बीच समन्वय की रूपरेखा तैयार की गई है।
अधिकारी ने बताया कि एसओपी में जानवरों की संख्या के साथ ही आमजन की सुरक्षा और कानूनी प्रक्रियाओं के पालन पर जोर दिया गया है।
अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने बताया कि प्रत्येक रेंज स्तर पर टीम का गठन अनिवार्य किया गया है जबकि जानवर को पकड़ने के अभियान की जिम्मेदारी उपवन संरक्षक को सौंपी गई है, जिससे जवाबदेही तय हो सके।
अधिकारी ने बताया कि तेंदुए को पकड़ने के दौरान संबंधित उपवन संरक्षक अपने स्तर से संबंधित जिले के जिलास्तरीय अधिकारियों से संपर्क एवं समन्वय स्थापित करेंगे।
अरुण प्रसाद ने बताया, “उपवन संरक्षक और टीम तेंदुए का पता चलने पर उसके चारों ओर लगभग 100-200 मीटर दूरी पर स्थिति अनुसार लोगों को एकत्रित नहीं होने दें और इसके लिए पुलिस एवं वनकर्मियों की मदद लें। जानवर को पकड़ने के दौरान एक कर्मचारी पूरे घटनाक्रम की तस्वीरें ओर वीडियो बनाएं।”
उन्होंने बताया कि किसी तेंदुए को आदमखोर घोषित करने के लिए सख्त वैज्ञानिक और कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया जाएगा तथा ऐसे मामलों को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
भाषा बाकोलिया जितेंद्र
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